• Thu. Mar 26th, 2026

धनबादः हिंदी साहित्य विकास परिषद के 44 वें स्थापना दिवस पर सजी सुरों की महफिल, कैलाश खेर ने अपने गीतों से बांधा समां

Admin Office's avatar

ByAdmin Office

Sep 25, 2023

 

धनबादः हिंदी साहित्य विकास परिषद के 44 वें स्थापना दिवस सह हिंदी दिवस पर गोल्फ ग्राउंड में रंग बिरंगी चकाचौंध म्यूजिकल रौशनी के बीच सूफी पार्श्व गायक कैलाश खेर ने अपनी गीतों के साथ ना सिर्फ लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया, बल्कि देश के धार्मिक शब्दों का लोगों को अर्थ समझाकर उनकी धार्मिक आस्था को और भी प्रगाढ़ करने का काम कैलाश खेर ने मंच के माध्यम से किया है.

कैलाशा बैंड के साथ कैलाश खेर ने अपनी गीतों से लोगों का दिल जीत लिया। गीतों के साथ नृत्य से लोगों को झूमने पर मजबूर कर डाला. उनके मंच पर आते ही चारों ओर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी. उन्होंने अपनी पहली गीत पर ही समा बांध दिया. एक से बढ़कर एक गीतों की प्रसतुति मंच से दी.

लोगों को भी उन्होंने अपने साथ गाने पर मजबूर कर दिया. गानों के बीच में मंच से वह धार्मिक बातें भी करते रहे. विश्व में भारत के धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने उनके अर्थ भी लोगों समझाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हमारे शब्दों का विदेशी खूब इस्तेमाल करते हैं. झारखंड को लेकर उन्होंने कहा कि यह धनी राज्य है. यहां अकूत खनिज संपदा भरी हुई है. क्योंकि झारखंड में भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं. भगवान भोले यहां विराजमान हैं.

इसलिए यहां के लोग भी बड़े भोले भाले हैं. वॉइस ऑफ इंडिया फेम और कोयलांचल के लाल रचित अग्रवाल ने भी अपने बैंड के साथ प्रस्तुति देकर लोगों का मन मोह लिया.


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *