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दोनों ने आज़ादी अपना ली’: सुप्रीम कोर्ट की मुहर के साथ समाप्त हुआ उमर अब्दुल्ला और पायल का 32 साल पुराना वैवाहिक सफर*

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Jul 31, 2026
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला तथा उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच दशकों से चल रहा वैवाहिक विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत ने दोनों पक्षों की आपसी सहमति को स्वीकार करते हुए उनके विवाह को भंग करने का आदेश दिया।

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस लंबे कानूनी संघर्ष पर अंतिम मुहर लगा दी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलील—‘दोनों ने आज़ादी को अपना लिया है’—के बाद अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया। लगभग 13 से 17 वर्षों के अलगाव के बाद यह रिश्ता कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है।

 

*होटल की नौकरी से शुरू हुई प्रेम कहानी*

 

उमर अब्दुल्ला और पायल नाथ की मुलाकात किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। 1990-91 के आसपास नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ओबेरॉय होटल में दोनों एक साथ काम करते थे। कार्यस्थल पर बिताए गए समय ने पेशेवर संबंध को गहरे प्रेम में बदल दिया। समाज, धर्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि की बाधाओं को पार करते हुए दोनों ने 1 सितंबर 1994 को विवाह कर लिया। उमर कश्मीरी मुस्लिम परिवार से थे, जबकि पायल एक प्रतिष्ठित सिख परिवार की बेटी थीं। इस अंतरधार्मिक विवाह को लेकर कुछ हलकों में हल्की-फुल्की चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन दोनों परिवारों ने इसे स्वीकार कर लिया था। उमर ने बाद में एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि परिवारों का समर्थन मिला था। विवाह के बाद भी पायल ने अपना पारंपरिक नाम बनाए रखा।

 

शादी के शुरुआती वर्षों में जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। दोनों के दो बेटे—ज़हीर और ज़मीर—हुए, जो आज कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। पायल अक्सर उमर के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आती थीं। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं।

 

*राजनीति में प्रवेश और बढ़ती दूरियां*

 

1998 में उमर अब्दुल्ला ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। अपने पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारियां संभालते हुए वे जम्मू-कश्मीर की राजनीति के केंद्र में आ गए। राजनीतिक व्यस्तता, लंबे दौरे और सार्वजनिक जीवन की मांगों ने निजी जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे उमर का राजनीतिक कद बढ़ा, वैसे-वैसे वैवाहिक संबंधों में दरारें पड़ने लगीं।

 

साल 2009 से दोनों अलग रहना शुरू कर चुके थे। 2011 में यह अलगाव सार्वजनिक हो गया। पायल अपने दोनों बेटों के साथ दिल्ली में बस गईं। उमर कश्मीर और दिल्ली के बीच राजनीति में व्यस्त रहे। पिछले 15-17 वर्षों में वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके थे। उमर पक्ष की ओर से अदालत में यह दलील दी गई थी कि 2007 के बाद से कोई वैवाहिक संबंध नहीं रहे और 2009 से अलग जीवन जी रहे हैं।

 

*कानूनी संघर्ष की लंबी गाथा*

 

उमर अब्दुल्ला ने पहले फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की। अगस्त 2016 में फैमिली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की गई, लेकिन दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। उमर ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक मांगा था।

 

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई बार प्रयास हुए। अगस्त 2024 में अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा। लंबे समय तक विवाद चलता रहा। अंततः जुलाई 2026 में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समझौता कर लिया। 22 जुलाई को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत संयुक्त आवेदन दायर किया गया, जिसमें विवाह भंग करने और सभी लंबित मामलों को वापस लेने की बात कही गई।

 

शुक्रवार को जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों ने सभी विवाद सुलझा लिए हैं। ‘दोनों ने आज़ादी अपना ली है। सब तय हो गया है। लॉर्डशिप्स तलाक दे सकते हैं। अन्य सभी मामले वापस लिए जाएंगे,’ सिब्बल की ये बातें अदालत में गूंजीं। पीठ ने जवाब दिया, ‘यह अच्छा है। हम इन्हीं शर्तों पर मामले का निपटारा करेंगे।’

 

*पायल अब्दुल्ला: एक स्वतंत्र पहचान वाली महिला*

 

पायल नाथ एक सम्मानित सिख परिवार से हैं। उनके पिता रामनाथ भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। परिवार की जड़ें पाकिस्तान के लाहौर से जुड़ी हैं। भारत-विभाजन के समय वे दिल्ली आकर बस गए थे। पति से अलग होने के बाद भी पायल ने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने हिमाचल प्रदेश में मिनरल वाटर पैकेजिंग प्लांट और ट्रैवल बिजनेस सफलतापूर्वक चलाया। उद्यमिता के क्षेत्र में उन्होंने अपनी जगह बनाई। बेटों की परवरिश और अपना व्यवसाय संभालते हुए उन्होंने एक मजबूत व्यक्तित्व का परिचय दिया।

 

*राजनीतिक संदर्भ और व्यक्तिगत जीवन का संतुलन*

 

उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी राजनीतिक सक्रियता बनी हुई है। लंबे कानूनी विवाद ने निजी जीवन को प्रभावित किया, लेकिन सार्वजनिक रूप से उन्होंने इस मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं दिया। अंत में आपसी सहमति से समाधान निकलना दोनों पक्षों के लिए राहत की बात है। बेटे ज़हीर और ज़मीर अब वयस्क हो चुके हैं और कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के इस पहलू ने भी शायद समझौते में भूमिका निभाई।

 

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक व्यक्तिगत मामले का अंत नहीं है। यह उन कई मामलों की याद दिलाता है जहां लंबे अलगाव के बाद अदालतें अनुच्छेद 142 का सहारा लेकर ‘मृत विवाह’ को समाप्त करती हैं। अदालत ने बार-बार कहा है कि जहां रिश्ता पूरी तरह टूट चुका हो और दोनों पक्ष स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हों, वहां न्याय की दृष्टि से तलाक देना उचित है।

 

*अंतिम अध्याय और आगे का रास्ता*

 

लगभग 32 वर्ष पहले शुरू हुआ यह वैवाहिक सफर अब कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। ओबेरॉय होटल की उन दिनों से लेकर कश्मीर की राजनीति, दिल्ली की अदालतों और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक का सफर लंबा और थकाऊ रहा। लेकिन अंत में दोनों पक्षों ने सौहार्दपूर्ण ढंग से इसे सुलझा लिया। कपिल सिब्बल के शब्दों में—‘दोनों ने आज़ादी अपना ली है’—यह वाक्य इस पूरे अध्याय का सार बन गया।

 

अब उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला अपने-अपने जीवन के नए अध्याय शुरू करेंगे। राजनीतिक जिम्मेदारियां, व्यवसाय और बच्चों का भविष्य—ये सभी पहलू आगे बढ़ेंगे। कानूनी विवाद समाप्त होने से दोनों को मानसिक शांति मिलेगी। समाज में ऐसे मामलों को लेकर चर्चा होती रहती है, लेकिन अंततः व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आपसी सम्मान ही महत्वपूर्ण है।

 

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन सभी लंबित मामलों को भी समाप्त करता है जो दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दायर किए थे। समझौते की शर्तों के अनुसार सब कुछ वापस ले लिया जाएगा। इस तरह लगभग डेढ़ दशक का अलगाव अब औपचारिक तलाक में बदल चुका है।

यह घटना याद दिलाती है कि रिश्ते कितने भी गहरे क्यों न हों, समय और परिस्थितियां उन्हें बदल देती हैं। प्रेम कहानी से शुरू हुआ सफर कानूनी अध्याय पर समाप्त हुआ, लेकिन दोनों पक्षों ने इसे गरिमा के साथ निपटाया। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सक्रिय उमर अब्दुल्ला और दिल्ली में अपना व्यवसाय संभाल रही पायल अब स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट की मुहर के साथ यह लंबा अध्याय बंद हो गया है।


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