
सरायकेला: चाकुलिया-बहरागोड़ा सीमा पर दहशत का पर्याय बना प्रिय जंगली हाथी ‘रामलाल’ आखिरकार दलमा जंगल की ओर लौट रहा है। वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक ‘रामलाल’ दलमा गज परियोजना का ही हाथी है। आमतौर पर दलमा के हाथी शांतप्रिय माने जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भटककर यह झुंड से अलग हो गया था।

*बंगाल बॉर्डर से लौटा झुंड*

वन विभाग के ट्रैकर दल ने पुष्टि की है कि लोधाशोली-अमतोलिया जंगल में डेरा डाले 7 से 9 हाथियों का झुंड भी अब धीरे-धीरे दलमा गज परियोजना क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। आशंका है कि भोजन-पानी की तलाश में यह झुंड बंगाल सीमा की ओर चला गया था।
दलमा रेंज के वन क्षेत्र पदाधिकारी ने बताया, “रामलाल हमारे पुराने दल का ही सदस्य है। गर्मी और भोजन की कमी के कारण हाथी अक्सर दलमा छोड़कर बंगाल-ओडिशा बॉर्डर तक चले जाते हैं। फिलहाल रामलाल और झुंड के कुछ सदस्य दलमा के फुटहिल एरिया में ट्रेस किए गए हैं।”
*ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह*
हालांकि हाथी के लौटने से चाकुलिया-बहरागोड़ा के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन वन विभाग ने अलर्ट वापस नहीं लिया है। विभाग का कहना है कि हाथियों का मूवमेंट अनिश्चित होता है। दलमा पहुंचने तक झुंड रास्ते में पड़ने वाले गांवों में फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रामीणों से अपील की गई है कि रात में खेतों की रखवाली के लिए अकेले न जाएं, तेज आवाज या आग से हाथियों को न उकसाएं और मूवमेंट दिखने पर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना दें।
*दलमा में बढ़ाई गई निगरानी*
हाथियों के लौटने की सूचना पर दलमा अभयारण्य में गश्त बढ़ा दी गई है। वाटर होल्स में पानी की व्यवस्था और चारा की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि हाथी दोबारा आबादी की ओर न भटकें।
वन विभाग के अनुसार मानसून आने तक हाथियों का मूवमेंट तेज रहता है। ऐसे में सीमावर्ती गांवों में विशेष निगरानी दल तैनात रहेगा।
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