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झारखंड : पलामू के वनराखी से उपझा ”पर्यावरण धर्म” दुनिया का खींचा ध्यान, इस धर्म के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल के इस मूवमेंट को एनसीआरटी के सिलेवस में भी पढ़ाया जा रहा है बच्चों को

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ByAdmin Office

Dec 22, 2022

 

(झारखंड डेस्क)
झारखंड: अभी तक अगर धर्म की प चर्चा करते हैं तो हिन्दू ,धर्म, मुस्लिम धर्म,सिक्ख ,ईसाई और बौद्ध धर्म जैसे धर्मो की चर्चा करते हैं जिस में बंट कर लोग आप में उलझते है,सामाजिक सौहार्द को विगड़ते हैं और हमारे भारतीय परंपरा और संस्कार से खिलबाड़ करते हैं। लेकिन झारखंड से एक ऐसा धर्म का अभ्युदय हुआ जो देश हैं नही दुनिया का ध्यान अपने ओर खींचा है।यहांतक उस धर्म के प्रणेता को एनसीआरटी में भी जगह मिला और बच्चे उस धर्म के बारे में पढ़ेगें और जानेंगे भी।

दरअसल झारखंड के पलामू में एक नया धर्म फल-फूल रहा है। इसका नाम है, पर्यावरण धर्म। धीमी और सीमित संख्या में ही सही लेकिन इसे स्वीकारने वालों की संख्या न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है। इसे शुरू करने वाले हैं वनराखी आंदोलन के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल ।

कौशल किशोर जायसवाल जिससे भी मिलते हैं, पर्यावरण धर्म की शपथ दिलाते हैं और उस पर चलने का वचन लेते हैं। उनका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा है। वे साथ ही चेतावनी भी देते हैं कि चौथा विश्व युद्ध हवा के लिए होगा। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हम सब देख चुके हैं कि आक्सीजन के लिए कैसी मारामारी हुई। यह भविष्य में आने वाले संकट का संकेत भर है।

डाली में चल रहा पर्यावरण धर्म ज्ञान मंदिर का निर्माण
पलामू के छतरपुर के डाली बाजार पंचायत में कौशल पर्यावरण धर्म ज्ञान मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं। दो एकड़ में फैले जैविक उद्यान के बीच मंदिर है। इस उद्यान में 21 देशों के 200 से अधिक प्रजाति के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इसमें देवदार, चीर, कल्पतरू, सिंदूर, हींग, कपूर, आम, अमरूद, नींबू, चीकू, शीशम, शरीफा, पीपल वगैरह-वगैरह के पेड़ है। कौशल ने 1977 में पर्यावरण धर्म के तहत वन राखी आंंदोलन शुरू किया। उस डाली बाजार में उन्होंने 7.72 एकड़ में पौधा लगाया। आज यह जंगल का रूप ले चुका है। इसके साथ ही चेराई में 27 एकड़ में पौधरोपण कर जंगल खड़ा कर दिया है।

एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
69 वर्षीय कौशल अब तक 45 लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। लक्ष्य एक करोड़ पौधे लगाने का है। पर्यावरण की रक्षा के लिए 12 लाख से ज्यादा पेड़ों को राखी बांध चुके हैं। साल में चार बार 21 मार्च विश्व वानिकी दिवस, 22 अप्रैल पृथ्वी दिवस, 5 जून पर्यावरण दिवस और सावन पूर्णिमा के अवसर पर पेड़ों को रक्षा बांधते हैं। इसके लिए उन्होंने वन राखी मूवमेंट चला रखा है। साल 2017 में संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में एक सवाल पूंछा गया था कि वन राखी मूवमेंट किसने चलाया?

इतना ही नहीं सीबीएसई और आइसीएससीई की कक्षा छह के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में वन राखी मूवमेंट को शामिल किया जा चुका है। नेपाल, भूटान, श्रीलंका में भी पर्यावरण धर्म को लेकर अभियान चला चुके हैं।

1966 के अकाल से मिली प्रेरणा, पाठ्यक्रम का हिस्सा

देश में 1966 में अकाल पड़ा। पलामू की हालत बहुत खराब थी। अन्न पैदा नहीं होने के कारण लोग भूखे मर रहे थे। तब कौशल किशोर जायसवाल 13 साल के थे। लोगों को कहते सुना कि जंगलों की कटाई के कारण बारिश नहीं होने से आकाल पड़ा। तभी मन में पर्यावरण रक्षा का घर कर गया। 1967 में जंगल बचाओ-जंगल लगाओ अभियान शुरू किया। देश के जाने-माने पर्यावरण विद् सुंदर लाल बहुगुणा, पानूरंग हेगड़े, इंद्रजीत कौर, धूम सिंह नेगी जैसे के साथ काम कर चुके हैं। अब तक 22 राज्यों के 108 जिलों में स्कूलों में जाकर बच्चों को पर्यावरण धर्म की शपथ दिला चुके हैं।

इन्होंने इस धर्म के 8 मूल मंत्र घोषित कर रखे हैं-हर खास अवसर पर पौधरोपण, जल संग्रह, जंगल की रक्षा, जमीन में फर्टिलाइजर का उपयोग नहीं करेंगे, जानवर, पक्षी और प्रकृति की रक्षा करेंगे।


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