

झरिया: कोयलांचल की हृदयस्थली झरिया के राजमाता शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ समापन हो गया।

हवन और पूर्णाहूति के साथ संपन्न हुए इस अनुष्ठान से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। यज्ञ आचार्य पंडित योगेंद्र उपाध्याय ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस ज्ञान यज्ञ की शुरुआत एक सप्ताह पूर्व भव्य मंगल कलश यात्रा के साथ हुई थी। सात दिनों तक चले इस आध्यात्मिक महोत्सव में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आचार्य बद्री पांडे ने अपनी अमृतमयी वाणी से उपस्थित जनसमूह को भागवत कथा का मर्म समझाया।
उन्होंने कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा “भगवान व्यास की अद्भुत रचना श्रीमद् भागवत महापुराण कलयुग में प्राणियों के उद्धार का सुगम माध्यम है। इसे ‘पंचम वेद’के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है, जो मनुष्य को जीवन जीने की कला और मोक्ष का मार्ग दिखाती है।” सात दिनों तक मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने कथा श्रवण किया, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो मंदिर प्रांगण में निरंतर ‘भक्ति की गंगा’ प्रवाहित हो रही हो।
इस धार्मिक अनुष्ठान के सफल संचालन में मुख्य यजमान के रूप में उषा देवी एवं उनके परिवार की सराहनीय भूमिका रही। उनके सहयोग और समर्पण से ही यह विशाल आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ। राजमाता शिव मंदिर में आयोजित इस भागवत कथा ने न केवल लोगों को आध्यात्मिक शांति प्रदान की, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक समरसता और धार्मिक चेतना को भी सुदृढ़ किया। भक्तों की विदाई के समय आंखें नम थीं, लेकिन मन ‘राधे-राधे’ के जयघोष से प्रफुल्लित था।
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