
*धनबाद :* कोयलांचल धनबाद का प्रदूषण देशभर में चर्चा का विषय बनता है। कुछ माह पहले यहां के प्रदूषण ने देश की राजधानी दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया था। पिछले एक दशक में पहली बार प्रदूषण का स्तर यानि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) की सघनता 554 दर्ज की गई थी।

इसमें पीएम-2.5 का स्तर 544.2 और पीएम-10 का स्तर 554.9 शामिल था। यह राष्ट्रीय मानक 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) से कहीं अधिक दर्ज किया गया।

*झरिया में 22 टन कचरे के ढेर में लगी आग*
आज भले ही यह स्थिति नहीं है, लेकिन सघनता 150 से अधिक ही दर्ज हो रही है। इसके बावजूद भी हम सजग नहीं हो रहे हैं। धनबाद के लोगों की सांसें किस तरह कम हो रही हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। झरिया के बनियाहीर में इस समय 22 लाख टन कचरे का ढेर लग गया है। इसमें आग लगी हुई है। इसका जहरीला धुआं लोगों की बीमार कर रहा है। सांसें छीन रहा है।
*लोगों की सेहत पर पड़ रहा प्रदूषण की सीधा असर*
विकास के नाम पर पिछले पांच वर्षों में 25 हजार से अधिक पेड़ काट डाले गए, लेकिन इसकी तुलना में 30 प्रतिशत भी पौधारोपण नहीं हुआ। बीसीसीएल आज भी नियमों को ताक पर रख खुली गाड़ियों से कोयला ट्रांसपोर्टिंग करा रही है।
प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खासकर दमा, आंख की रोशनी कम होना एवं अनवरत सर्दी-खांसी से यहां लोग जूझ रहे हैं। चिकित्सकों के पास 30 प्रतिशत मरीज इसी के पहुंच रहे हैं। अगर हम आज नहीं चेते तो कल बचाना मुश्किल हो जाएगा।
पांच वर्षों में काटे 25 हजार पेड़, 30 प्रतिशत भी पौधारोपण नहीं
डिगवाडीह, जोड़ापोखर, झरिया कतरास मोड़, बैंक मोड़, श्रमिक चौक, सिटी सेंटर, रणधीर वर्मा चौक, आइआइटी गेट और स्टील गेट, ये कुछ इलाके ऐसे हैं जहां राष्ट्रीय मानक से अधिक एक्यूआइ का स्तर दर्ज किया जाता है। गाड़ियों का धुआं, कोयला ट्रांसपोर्टिंग, झरिया की आग के साथ ही एक बड़ा कारण हरे-भरे पेड़ों की कटाई भी है।
प्रदूषण कम करने, कार्बनडाइक्साइड सोखने और धूलकण खत्म करने में पेड़ बड़ी भूमिका निभाते हैं। धनबाद में 25 हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कीमत पर सड़कों का जाल बिछा दिया। इसकी तुलना में 30 प्रतिशत भी पौधे नहीं लगे। इसका असर धनबाद के मौसम पर भी हो रहा है। गर्मी बढ़ रही है।
सूबे की पहली 20 किमी लंबी आठ लेन सड़क के लिए गोल बिल्डिग से कांको मठ तक 8500 पेड़ काटे गए। इनमें से भूली के कसियाटांड में 2874 पेड़ रिप्लांटेशन के तहत लगाए गए। समुचित देखभाल न होने और नई मिट्टी में न पनपने की वजह से सभी पेड़ सूख गए।
पांच वर्षों में 100 वर्ष से भी अधिक पुराने 600 पेड़े कटे।
गोविंदपुर-महुदा फोरलेन सड़क के लिए 3142 पेड़ काटे गए। इनमें 90 प्रतिशत पेड़ 70 वर्ष से अधिक पुराने थे।
बैंक मोड़-सिंदरी सड़क सौंदर्यीकरण में 100 पेड़ कटे।
गोविंदपुर-गिरिडीह सड़क चौड़ीकरण में 7097 हरे-भरे पेड़ काटे गए।
एनएच-2 फोरलेन में छह हजार पेड़ों की बलि चढ़ी।
गोल बिल्डिंग से कांकोमठ आठ लेन सड़क पर 8500 पेड़ काटे गए। इसके एवज में कसियाटांड़ में लगे 2874 पेड़ भी सूख गए।
स्टेट हाइवे अथारिटी आफ झारखंड (साज) के अधीन दो एजेंसी काम कर रही है। इन्हें ही इस क्षेत्र में पेड़ों का रिप्लांटेशन करना था। सही देखभाल न होने और खानापूर्ति के कारण अधिकतर पेड़ सूखे।
हाई पावर कमेटी ने काटने की तुलना में अधिक पेड़ लगाने की शर्त पर दी थी अनुमति, जांच भी नहीं हुई।
*हरियाली और पर्यावरण संरक्षण पर होगा काम*
नगर आयुक्त सत्येंद्र कुमार के अनुसार, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत पूरे नगर निगम क्षेत्र में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें ग्रीन पैच वर्क, ग्रीन एरिया का विकास, पौधारोपण, स्लज ट्रीटमेंट प्लांट और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट का निर्माण शामिल है।
10 करोड़ कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट पर खर्च किया जाना है। इसके अंतर्गत भवन निर्माण और अन्य निर्माण कार्य से निकले बिल्डिंग मटेरियल की काम की चीज में परिवर्तित की जाएगी। कला भवन से हीरापुर तक ग्रीन पैच बनेगा। इस पर एक करोड़ 66 खर्च होंगे।
इसके अलावा सवा चार करोड़ में स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, रोड कंस्ट्रक्शन डिमोलिशन वेस्ट प्लांट और एफएसटीपी यानी फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनना है। तालाबों के संरक्षण पर 18 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।
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