
*झारखंड में फिल्माए गए इस फिल्म में जहां ग्राम्य जीवन दर्शन,कला- संस्कृति, ऐतिहासिक स्थलों को दिखाया गया है वहीं पवित्र प्रेम कहानी के साथ इमोशन, कनेक्शन, डेडीकेशन, कमिटमेंट, नॉलेज और भरपूर एक्शन रोमांचित करेगा*

जोहार एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की शीघ्र ही प्रदर्शित होने वाली हिंदी फीचर फिल्म “आ भी जा ओ पिया” आगामी 7 अक्टूबर 2022 को भारत के सिनेमाघरों में आ रही है। इसके मुख्य कलाकार यारियां फिल्म फेम देव शर्मा और रोजा टीवी सीरियल की मशहूर अभिनेत्री स्मृति कश्यप हैं। अभिनेता देव शर्मा मूलतः दिल्ली से हैं लेकिन मुंबई में रहते हैं वहीं अभिनेत्री स्मृति कश्यप बिहार की राजधानी पटना से है लेकिन ये भी मुंबई में रहती हैं। स्मृति कश्यप साउथ इंडिया में बेहद लोकप्रिय हैं और सन टीवी के धारावाहिक रोजा में लीड भूमिका में नजर आई हैं। फिल्म के निर्देशक राजेश हरिवंश मिश्रा मूलतः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हैं। इसकी कहानी एसके सचिन ने लिखी है जो झारखंड के ही हजारीबाग जिले के कर्णपुरा की रत्नगर्भा धरती बड़कागांव के सांढ गांव के रहने वाले हैं। म्यूजिक आशुतोष सिंह की है। सोनू निगम, पलक मुछाल, दीपाली सहाय, केका घोषाल, मेघा श्रीराम डाल्टन और राहुल पांडेय ने इस फिल्म में अपनी आवाज दी है। इस फिल्म के निर्माता विनय मेहता, उमेश राणा, शंभू मेहता और आनंद माथुर हैं। इनमे से उमेश राणा वरिष्ठ पत्रकार हैं। उमेश राणा ने पहली बार 1999 में खोरठा भाषा में टेली फिल्म बनाई थी। इनकी जय बाबा विश्वकर्मा अलबम बेहद लोकप्रिय है जिसके सभी गीतों को इन्होंने खुद लिखा है। इनकी गीतों को प्रसिद्ध गायक रविंद्र जैन, अनुराधा पौडवाल, पामेला जैन, राजेन्द्र जैन सहित अन्य नामचीन गायकों ने अपनी आवाज दी है। फिल्म में साईं बाबा फिल्म के मुख्य किरदार मुकूल नाग, अभिजीत लहिरी, संजीव दास गुप्ता सरीखे कलाकारों ने अभिनय किया है। हजारीबाग के कलाकारों ने भी इस फिल्म में जबरदस्त अभिनय किया है। हजारीबाग के कलाकारों में रिचा कालरा, अनुराग मिश्रा, अभिमन्यु कुमार, रोहित वर्मा, सीमा मोदी, रूपाली, निधि सहित अन्य कलाकारों का नाम शामिल है ।

07 अक्टूबर 2022 को यह फिल्म पूरे भारतवर्ष में रिलीज हो रही है। इस फिल्म के प्रमोशन को लेकर एक अक्टूबर को लक्ष्मी सिनेमा हॉल के परिसर में इस फिल्म के कलाकारों ने प्रेस को संबोधित किया। साथ में सदर विधायक मनीष जायसवाल थे। उन्होंने फिल्म की सफलता के लिए निर्माताओं को शुभकामनाएं दी एवं मुंबई से चलकर हजारीबाग पहुंचे कलाकारों को बधाई दिया। कहा कि फिल्म निर्माण करना एक साहस का काम होता है, सो यहां के निर्माताओं ने इस फिल्म के निर्माण एवं प्रदर्शन में काफी साहस जुटाया।
फिल्म का आइटम सॉन्ग छोड़कर बाकी पूरी फिल्म झारखंड के विभिन्न लोकेशंस पर फिल्माए गए हैं। आइटम सॉन्ग मुंबई के एक मशहूर स्टूडियो में शूट हुआ है। इस फिल्म की शूटिंग हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, रांची और टंडवा में हुई है।
इसमें स्थानीय कलाकारों को भी भरपूर मौका दिया गया।हजारीबाग के विद्या सिनेमा घर में यह फिल्म 7 अक्टूबर को लगेगी। इस फिल्म के माध्यम से झारखंड के ऐतिहासिक स्थलों को एक्सपोज किया गया है और कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले कलाकारों को रोजगार का अवसर प्रदान किया गया है। फिल्म पूरी तरह पारिवारिक और मनोरंजक है। यह फिल्म इमोशन, कनेक्शन, डेडीकेशन,
कमिटमेंट और नॉलेज से भरपूर है। फिल्म के माध्यम से हिंदुस्तान की कला- संस्कृति और सभ्यता का अद्भुत दर्शन कराया गया है। इस फिल्म में एरी एलेक्सा डिजिटल कैमरे से फिल्म की शूटिंग हुई इसी कैमरे से गदर फिल्म भी शूट हुई थी ।
*इन प्रमुख लोकेशन में फिल्माया गया है फिल्म*
फिल्म को जिन प्रमुख जगहों में फिल्माया गया है उसमें बड़कागांव, महूदी पहाड़, बरसो पानी, इसको गुफा, राजा दलेल सिंह का किला, चुंदुरु खावा टंडवा, तिलैया डैम, नरसिंह स्थान मेला, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट रांची, तमासिन चतरा, बरकट्ठा का सूर्य कुंड, पदमा किला, जवाहर पुल कोडरमा, पोड़ैया गांव, हजारीबाग शहर, कृषि पर्यटन स्थल डेमोटांड़, सालपर्णी जंगल सहित अन्य स्थान शामिल हैं ।
*क्या है फिल्म की कहानी*
फिल्म की कहानी बेहद ही मनोरंजक हैं। इसमें इमोशन, कनेक्शन, डेडीकेशन,
कमिटमेंट, एक्शन, इंटरटेनमेंट और नॉलेज से भरपूर हैं। जहां खूबसूरत वादियां आपको लुभाएगी वहीं फिल्म के कैरेक्टर आपको बांधे रखेंगे। फिल्म में कुल छः गीत हैं जो बड़े ही कार्णसुखकारी हैं। फिल्म की कहानी शुरू होती है एक मिलीट्री वेस्ट युवती कल्पना से जो मिलीट्री बैकग्राउंड से रहती है और रिसर्च स्कॉलर रहती है। ये अपनी मां के साथ कार में सवार होकर पुरातत्व के क्षेत्र में शोध के लिए गांव ( बड़कागांव) की ओर जाती है। ये यहां ग्राम परिवेश में स्थानीय महुदी पहाड़ी, राजा दलेल सिंह का किला,
इसको गुफ़ा और बरसो पानी सहित आसपास के ऐतिहासिक स्थल के भ्रमण का प्लान बनाती है तभी अचानक तेज़ बारिश और आंधी तूफान आ जाता है इसी दौरान जहां ये लोग रहते हैं वहां से शहर आने का रास्ता ब्लॉक हो जाता है। एक नदी (सिरमा) नदी का पुल टूट जाने के कारण और नदी में अत्यधिक बाढ़ आने के कारण ये लोग फंस जाते हैं। भयंकर आंधी में इनके गाड़ी पर एक पेड़ की मोटी टहनी भी टूटकर गिर जाती है। ऐसे में ये बुरी तरह फंस जाते हैं। तभी एंट्री होती हैं शहर से पढ़ लिखकर गांव वापस लौटे कौशल की। कौशल शहर से पढ़ लिखकर गांवों से विलुप्त होती खेती गृहस्ती को बढ़ावा देने गांव आता है। जहां बोनसाई के पौधे को बढ़ावा देता है और खुद की एक बड़ी नर्सरी तैयार करता है। हर दिन की तरह जब कौशल अपने मवेशियों को ढूंढने आंधी- तूफान में जंगल की ओर जाता है तभी रास्ते में एक कार पर उसकी नजर पड़ती है जिसमें सवार लोग पेड़ की टहनी गिरने से परेशान रहते हैं।
कौशल सामने जाकर उनकी गाड़ी को सुरक्षित निकालता है और फिर नदी का पुल टूटने के कारण गाड़ी पर सवार कल्पना और उनकी मां को अपने साथ अपने गांव के घर पर ले जाता है। जहां दोनों का एक दूजे से पहला परिचय होता है। फिर आसपास के हिस्टोरिकल प्लेस पर कल्पना ले जाने का आग्रह कौशल से करती है। कौशल अपने बुलेट पर सवार होकर आसपास के सभी ऐतिहासिक जगहों का लगातार विजिट कराता है। इस दौरान दोनों घुल मिल जाते हैं और एक दूसरे को चाहने लगते हैं। तभी मिलीट्री बैकग्राउंड से होने के कारण कल्पना के परिवार वाले बेहद संभ्रांत परिवार के होते हैं। उनके दादा सहित परिवार वाले ढूंढते हुए उस गांव तक पहुंच जाते हैं जहां कल्पना रहती है। फिर उसे अपने साथ शहर ले जाते हैं जहां इनकी व्यस्कता और बढ़ती उम्र को देखते हुए शादी कराने का प्लान बनता है। कल्पना की शादी के लिए अगुवाई करने वाला एक ऐसे दूल्हे की खोज करता है जो खुद क्रिमिनल और ड्रगिस्ट रहता है। इसी बीच कल्पना के परिवार वाले इस रिश्ते पर हामी भरते हैं। तभी काली और घटा के बीच की एक कहानी फिल्म में आती है। इन दोनों की कहानी भी दर्शकों को बांधे रखेगी। कल्पना के परिवार वाले को किसी को झरने दूल्हे के राजेश होने की सूचना दे देता है। बाद में बड़े विवाद के बाद यह शादी की बात नहीं बनती है और अंततः रिश्ता बनने से पहले ही टूट जाता है।
जिसके बाद गांव के एक इनोसेंस लड़की कौशल और शहर की एक इंटेलिजेंट लड़की कल्पना के बीच प्रथम मिलन का प्रेम इस कदर उमड़ता है कि कल्पना शहर से भागकर फिर गांव पहुंच जाती है और अपने पवित्र प्रेम का इजहार गांव वालों की भीड़ के सामने कर देती है।
कल्पना के परिवार वाले भी इस रिश्ते को स्वीकार कर लेते हैं और फिल्म की कहानी इसी प्रकार से समाप्त हो जाती है। इस कहानी के दौरान झारखंडी संस्कृति की झलक मंडा पर्व की परंपरा के साथ सनातन संस्कृति की झलक, पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले वृक्ष रक्षाबंधन की परंपरा और ग्राम्य जीवन दर्शन के साथ खेती गृहस्ती और अखाड़ा संस्कृति को भी बखूबी दर्शाया गया है ।
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