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जिस लक्ष्य के लिए आपने बंदूकें उठायी, अब उसे सरकारी योजनाओं से हासिल करें :- हेमंत सोरेन,

ByAdmin Office

Jan 28, 2023

पहली बार बूढ़ा पहाड़ में सरकार, सीएम ने रखी 100 करोड़ की योजनाओं की आधारशिला,

गढ़वा :- विगत 32 वर्षों तक शीर्ष नक्सलियों की शरणस्थली का गवाह रहा बूढ़ा पहाड़ आज विकास के पथ पर है. राज्य सरकार की तमाम योजनाओं को यहां के लोगों तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है. इन्हीं कोशिशों की जानकारी लेने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरे सरकारी महकमें के साथ बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. ऐसा करने वाले वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं. स्थानीय लोगों से मुख्यमंत्री ने कहा, जिस लक्ष्य के लिए उन्होंने बंदूक-गोलियां उठायी थीं, उसे अब वे सरकारी योजनाओं से हासिल करें. हेमंत सोरेन ने गढ़वा जिले के टेहरी पंचायत स्थित बूढा पहाड़ के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये के बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया. इस दौरान मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरूण एक्का सहित कई अधिकारी उपस्थित थे.

इस मौके पर सीएम हेमंत ने कहा, आज एक लंबे संघर्ष और कार्ययोजना का परिणाम है कि बतौर मुख्यमंत्री वे, सरकारी महकमा, ग्रामीण और आमजन यहां जमा हुए हैं. खूबसूरत वादियों को फिर से हराभरा करने के लिए सरकार ने एक सुनियोजित योजना बनाकर काम किया. आज यहां एक मजबूत नींव रखी गई है. हेमंत ने कहा कि आज यहां वे हेलीकॉप्टर से आए हैं, बहुत जल्द यहां सड़क मार्ग से आना संभव हो सकेगा.

सीएम ने कहा, एक पिछड़ा राज्य होने के नाते झारखंड को आर्थिक मदद की जरूरत है. पहले ही जीएसटी से राज्य को आर्थिक नुकसान हुआ. चुनौती भरे राज्य के लिए जरूरी है कि ऐसे प्रभावित इलाकों के लिए केंद्र सरकार राज्य को अतिरिक्त आर्थिक मदद दें.

सुुरक्षाबलों को उठाना पड़ा नुकसान, फिर भी मिली सफलता: डीजीपी,

सीएम के साथ गए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नीरज सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा बल के जवानों के मजबूत हौसले और इनके द्वारा चलाए “ऑपरेशन डबलबुल” और “ऑपरेशन ऑक्टोपस” के कारण ही आज बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों-उग्रवादियों से मुक्त कराया जा सका. सुरक्षा कैंप बनाया गया. जिसका फायदा यह हुआ कि आपके अधिकार-आपकी सरकार-आपके अधिकार के तहत सरकारी योजनाएं इन सुदूर इलाकों में पहुंचाया गया. डीजीपी ने कहा, सुरक्षा बलों की ओर से चलाये जा रहे निरंतर अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा. गत कुछ दशकों में 59 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए. 64 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से जख्मी हुए. 42 ग्रामीणों की उग्रवादियों द्वारा हत्या की गई, 10 ग्रामीण गंभीर रूप से जख्मी हुए. ऑपरेशन डबलबुल से कई बड़ी सफलताएं मिली. अभियान में एक कुख्यात उग्रवादी मारा गया. 20 लाख रुपे के ईनामी 11 शीर्ष उग्रवादी गिरफ्तार हुए. 30 अत्याधुनिक हथियारों एवं भारी मात्रा में गोला बारूद की बरामदगी हुई, कई बंकर ध्वस्त किये गये. “ऑपरेशन ऑक्टोपस” से बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों-उग्रवादियों से मुक्त कराने में महत्ती सफलताएं मिली.

विगत तीन वर्षों में उग्रवादियों के विरूद्ध मिली सफलताएं
गिरफ्तारी : कुल 1319 उग्रवादियों गिरफ्तार हुए. इसमें पोलित ब्यूरो मेंबर -1 सेंट्रल कमिटी मेंबर-1, स्पेशल एरिया कमिटी मेंबर – 3, रिजनल कमिटी मेंबर – 1, जोनल कमांडर – 13, सब जोनल कमांडर – 29, एरिया कमांडर 57 शामिल हैं. इनपर कुल 2.63 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था.

आत्मसमर्पण : कुल 48 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इसमें स्पेशल एरिया कमिटी मेंबर-1, रिजनल कमिटी मेंबर-2, जोनल कमांडर-4, सब जोनल कमांडर-11, एरिया कमांडर-15 शामिल हैं. इनपर कुल 1.31 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. इसमें मुख्य शीर्ष नक्सली कमांडर विमल उर्फ राधेश्याम, अमन गंझू, बड़ा विकास आदि शामिल हैं.

पुलिस मुठभेड़ में मारे गये नक्सली : कुल 31 उग्रवादी मारे गए. इसमें रिजनल कमिटी मेंबर बुद्धेश्वर उरांव सहित रिजनल कमिटी मेंबर-2 जोनल कमांडर-1. सब जोनल कमांडर-2, एरिया कमांडर-5, एवं दस्ता सदस्य- 21 शामिल हैं. सभी पर कुल 44 लाख रूपये का इनाम घोषित था.

फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (सुरक्षा कैम्प) : उग्रवादी कोर एरिया में कुल 44 नये फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेसों यानी सुरक्षा कैम्प स्थापित किये गए. सभी कैम्प विकास केन्द्रों एवं जनकल्याण केन्द्रों के रूप में विकसित किया गया.


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