
केंद्र सरकार ने मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप (एमएएनएफ) को बंद करने का फैसला किया है।हम सभी विभिन्न फैलोशिप की दयनीय स्थिति से अच्छी तरह परिचित हैं।मौलाना आजाद छात्रवृति योजना अल्पसंख्यक शोधार्थियों को हमारे देश में प्रदान किया जाता था। कई अन्य फेलोशिप की तरह, एमएएनएफ भी अनियमित रहा है और इसका लाभ उठाने में देरी हुई है बहुत लंबे समय। दरअसल, कई छात्रों ने फेलोशिप के बंद होने पर अपनी शंका जताई थी। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन के केंद्रीय महासचिव सौरव घोष ने कहा कि सरकार ने पूर्व में भी नॉन-नेट फेलोशिप को रोकने का प्रयास किया था। डीएस कोठारी कोविड के दौरान पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप दो साल से बंद थी। MANF के अलावा, प्रतिष्ठित KVPY फेलोशिप और कई स्कूल स्तर की स्कॉलरशिप, विशेष रूप से प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप और राष्ट्रीय केंद्र सरकार द्वारा लड़कियों के लिए प्रोत्साहन योजना को या तो बंद कर दिया गया या उसमें भारी कटौती कर दी गई। पर दूसरी ओर छात्र बार-बार फेलोशिप को नियमित करने की मांग कर रहे थे।लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया छात्रों को हमेशा अंधेरे में रखा गया। जिला अध्यक्ष जीवन यादव ने कहा कि वास्तव में ये सभी प्रक्रियाएं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन का हिस्सा हैं ।जो पूरे शिक्षा क्षेत्र का निजीकरण करने का इरादा रखता है।वैज्ञानिक चिंतन और अनुसंधान के पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। यह सामान्य रूप से छात्रों और शोधार्थी समुदाय के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है ।हर गुजरते दिन के साथ कटौती की ये नीतियां दिन-ब-दिन उग्र होती जा रही हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा बेरोकटोक तो हजारों छात्रों को अनुसंधान क्षेत्र से हटा दिया जाएगा। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन की ऑल इंडिया कमेटी इस जानबूझकर किए गए हमले की निंदा करती है। अनुसंधान क्षेत्र और समाज के महत्वपूर्ण सोच रखने वाले शिक्षा प्रेमियों से सभी से आह्वान करते हैं। शिक्षा प्रेमी शिक्षा को बचाने के लिए इन शिक्षा विरोधी अनुसंधान विरोधी उपायों के खिलाफ एकजुट होना होगा।
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