
ऐसी मान्यता है कि जैसे नंदी से की गयी विनती शिव तक पहुंचती है, वैसे ही बलराम से की गयी प्रार्थना कृष्ण तक पहुंचती है। बलराम कृष्ण को बहुत प्रिय हैं। इन्हें नागों के अवतार के रूप में पूजा जाता है।

ऐसा कहते हैं कि जिस नाग शैय्या पर भगवान् विष्णु आराम करते हैं वो नाग और कोई नहीं स्वयं बलराम हैं और रामायण में राम के भाई लक्ष्मण भी बलराम ही थे।

भगवान् बलराम बहुत शक्तिशाली हैं और उन्होंने धेनुकासुर नामक राक्षस का भी वध करके प्रजा को संकटमुक्त किया था। अपनी असीम सुन्दरता के लिए भी भगवान् बलराम जाने जाते हैं। भगवान् बलराम के माध्यम से भगवान् कृष्ण या विष्णु तक पंहुचा जा सकता है इसलिए इनकी पूजा करना और इनकी जयंती मनाना बहुत लाभदायक होता है।

*बलराम जयंती पर हम आपको बताते हैं पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त।*
*बलराम जयंती कब है?*
बलराम जयंती 5 सितंबर 2023 मंगलवार को है और इसे उत्तर भारत में कई त्योहारों के रूप में मनाया जाता है जैसे कि हल षष्ठी, लालाही षष्ठी, ब्रज क्षेत्र में बलदेव छठ आदि।
गुजरात में इसे रंधन छठ के रूप में भी मनाया जाता है। बलराम जयंती की पूजा विधि सूर्योदय से पूर्व उठें और घर में गंगाजल छिड़क लें। अपने पूजा स्थल की साफ़ सफाई करके वहां बलराम जी की फोटो या मूर्ति स्थापित करें। फूल चन्दन धुप नेवैद्य दीपक आदि से बलराम भगवान् की पूजा करें। आरती करके प्रसाद ग्रहण करें। आज के दिन हल का दान किया जाए तो बलराम भगवान् विशेष प्रसन्न होते हैं।
*नोट:* यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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