
सुलहकुल की नगरी आगरा में कभी नजीर अकबराबादी अपनी कविताओं के माध्याम से शांति और अमन का पैगाम देते थे। आज हाजी इकबाल उस रिवाज को अपनी कला से कायम रखे हुए हैं। भारत सरकार द्वारा शिल्प गुरु के खिताब से नवाजे जा चुके मशहूर पच्चेकार जन्माष्टमी से पहले भगवान श्रीकृष्ण की बेशकीमती पत्थरों से बनी मूर्तियां दुनियाभर के मंदिरों और घरों के लिए बनाकर भेज चुके हैं।

हाजी इकबाल अहमद बताते हैं कि इस जन्माष्टमी पर उनके पास श्रीकृष्ण की तीन फुट तक की प्रतिमा के ऑर्डर आए। दिल्ली, मुंबई, बंगलूरु, हैदराबाद के अलावा दुबई, सऊदी अरब, अमेरिका, कनाडा आदि देशों से आई मांग के मुताबिक मूर्तियां तैयार करके भेजी जा चुकी हैं।

उनकी बनाई मूर्ति और तस्वीरों की देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जन्माष्टमी पर पूजा होगी। अहमद अपनी कला के लिए पूर्व में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार जीत चुके हैं। वे कहते हैं कि हम कलाकार हैं और हमारे पास हर मजहब का आदमी कुछ न कुछ ख्वाहिश लेकर आता है, तो उसे पूरा भी करते हैं। इस तरह के काम सुकून देते हैं। देश ही नहीं दुनिया के कई मंदिरों में तो कई मस्जिद और गुरुद्वारों तक में काम किया है। इकबाल बताते हैं कि देश विदेश मेंऑर्डर पर बनाई गई मूर्तियों को सादा पत्थरों से नहीं बल्कि महंगे पत्थरों से गढ़ा गया है। एक मूर्ति ब्रास-एमओपी (सेल) से बनाई है। ये पत्थर अंडमान-निकोबार से आता है।
एक मूर्ति ब्रास-मेलाकाइट से बनाई है। यह पत्थर साउथ अफ्रीका से मंगाया जाता है। एक मूर्ति को बनाने में तीन से पांच दिन लगते हैं।
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