
*एयरपोर्ट, एम्स की अभी तक नहीं बनी बात, वंदे भारत भी नसीब नहीं*

*दिल्ली – बेंगलुरु के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं,अब लुधियाना को भी छीनने की तैयारी!*

*धनबाद :* झारखंड की आर्थिक राजधानी में शुमार शहर धनबाद आज तक छला जाता रहा है। सबसे पहले कोल इंडिया का मुख्यालय फिर दामोदर घाटी निगम का मुख्यालय छीना गया।फिर रेलवे जोन का मुख्यालय छीना गया। फिर बारी आयी एम्स की तो वह भी छीन लिया गया। हवाई पट्टी रहने के बावजूद एयरपोर्ट का प्रस्ताव छीन लिया गया।
आज तक एक भी वन्दे भारत ट्रेनें नहीं दी गयी। आज तक नयी दिल्ली और बेंगलुरु के लिए कोई डायरेक्ट ट्रेन नहीं दी गयी।
उल्लेखनीय है कि कोयला राजधानी रहने के कारण यहां काफी पोटेंशियल है। बोकारो, जमशेदपुर, देवघर, दुमका, पश्चिम बंगाल, रांची से घिरे रहने के कारण यह हॉट केक बना हुआ है। यहां आये बिना किसी नेता, अभिनेता या मंत्री का पेट नहीं भरता। राजनीतिक मामलों में भी इसकी बहुत धाक है।
सूबे का रांची भले ही राजधानी है परन्तु आर्थिक राजधानी के तौर पर इसका ही नाम शुमार है। कोयले की वैध – अवैध खदानों के कारण यश नाम तस गुण के समान धन बरसता है। धन के कारण यहां प्रायः गैंगवॉर भी होते रहते हैं। इसलिए यहां सभी राजनीतिक दलों की अलग – अलग पकड़ भी है।
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