
अंतर्कथा : बरही/पंचम पाण्डेय

पंचमाधव स्थित आईलेक्स पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया गया जिसमें बच्चों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। साथ हीं ऊर्जा संरक्षण की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर निदेशक शैलेश कुमार ने बताया कि पूरे भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस लोगों द्वारा हर साल 14 दिसम्बर को मनाया जाता है। भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम वर्ष 2001 में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा निष्पादित (स्थापित) किया गया। ऊर्जा दक्षता ब्यूरों एक संवैधानिक निकाय है जो भारत सरकार के अंतर्गत आता है और ऊर्जा का उपयोग कम करने के लिए नीतियों और रणनीतियों के विकास में मदद करता है। ऊर्जा का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। कक्षा 9 की पायल कुमारी ने बताया कि कोई भी ऊर्जा की बचत इसकी गंभीरता से देखभाल करके कर सकता है, दैनिक उपयोग के बहुत से विद्युत उपकरणों को जैसे: बिना उपयोग के चलते हुये पंखों, बल्बों, समरसेविलों, हीटर को बंद करके आदि। यह अतिरिक्त उपयोग की ऊर्जा की बचत करने का सबसे कुशल तरीका है जो ऊर्जा संरक्षण अभियान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। लावण्या पाण्डेय ने बताया कि जीवाश्म ईंधन, कच्चे तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस आदि दैनिक जीवन में उपयोग के लिए पर्याप्त ऊर्जा उत्पन्न करते हैं लेकिन दिनों-दिन इनकी बढ़ती मांग प्राकृतिक संसाधनों के कम होने का भय पैदा करता है। ऊर्जा संरक्षण ही केवल एक ऐसा रास्ता है जो ऊर्जा के गैर- नवीनीकृत साधनों के स्थान पर नवीनीकृत साधनों को प्रतिस्थापित करता है। सुजीत कुमार ने ऊर्जा उपयोगकर्ताओं को ऊर्जा की कम खपत करने के साथ ही कुशल ऊर्जा संरक्षण के लिये जागरुक करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों की सरकारों ने ऊर्जा और कार्बन के उपयोग पर कर लगा रखा है। उच्च ऊर्जा उपभोग पर कर ऊर्जा के प्रयोग को कम करने के साथ ही उपभोक्ताओं को एक सीमा के अन्दर ही ऊर्जा का प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित करता है। सुधा कुमारी ने लोगों को इस विषय पर अधिक जागरुक होना चाहिये कि, कार्यस्थलों पर तेज रोशनी विभिन्न परेशानियों (बीमारियों) को लाती है जैसे: तनाव, सिर दर्द, रक्तचाप, थकान और कार्यक्षमता को कम करता है। जबकि, प्राकृतिक प्रकाश कार्यकर्ताओं के उत्पादकता के स्तर को बढ़ाता है और ऊर्जा की खपत को कम करता है।
बच्चों ने अपनी बातों को पोस्टर के जरिये भी दर्शाने कि कोशिश की। जिसमें सृष्टि केशरी, राहुल कुमार, पूर्णिमा कुमारी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अन्य बच्चों के प्रयास भी काफ़ी सराहनीय थे। विद्यालय के निदेशक ने कहा कि आज सबसे बड़ी समस्या ऊर्जा संरक्षण की है। और जैसा कि आज बच्चे जागरूक हो रहे हैं निःसंदेह ऊर्जा संरक्षण में सहायता मिलेगी।

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