
धनबाद
एक तरफ जमीन में लगी आग तो दूसरी तरफ वर्चस्व को लेकर छिड़ी जंग ने झरिया और कतरास को अशांत कर दिया है. अवैध कोयले का खेल जितना काला है, उतना ही यह जान लेने वाला भी है. कोयले की काली कमाई से रातों रात करोड़पति बनने का रास्ता हर पल मौत की तरफ जा रहा है. हाल के दिनों में झरिया और कतरास में गोलियों की गूंज यही संदेश दे रही है. इस खेल में कई लोग जेल जा चुके हैं, तो कई लोगों का घर उजड़ चुका है. हालांकि न तो कोयले की काली कमाई पर अंकुश लग रहा है, न खून-खराबा थम रहा है. पुलिस भी इस खेल को रोकने में नाकाम साबित हो रही है.

राज्यपाल की नसीहत व उलाहना भी बेअसर
हाल ही राज्यपाल रमेश बैस जब धनबाद दौरे पर आए तो उन्होंने भी इस खेल का जिक्र किया. प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस और बीसीसीएल को उलाहना देते हुए कहा कि जब कोयले के अवैध खनन और काली कमाई के बारे में सभी को मालूम है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती. परंतु लगता है, न तो प्रशासन और न ही कोयले के कारोबार में लिप्त लोगों पर राज्यपाल की नसीहत का कोई असर पड़ा. क्योंकि गवर्नर साहब के रांची लौटते ही झरिया और कतरास में खून-खराबा का भयावह दौर शुरू हो चुका है. झरिया में वर्चस्व की जंग और कतरास में कोयला कारोबारी की हत्या इस ढिठाई को चीख-चीख कर उजागर कर रही है.

दहशत में जी रहे दोनों शहरों के लोग
इन दोनों ही शहरों के लोग सहमे हुए हैं. पता नहीं, कब गोलियों की बौछार शुरू हो जाए. बम के धमाके लोगों के रोंगटे खड़े कर रहे हैं. विगत 8 जनवरी की रात कोयला कारोबारी सोनू सिंह को कतरास के तिलाटांड़ में गोली मार दी गई. उसका इलाज कोलकाता में चल रहा है. उसके बाद 19 जनवरी को झरिया के सिंहनगर में वर्चस्व कायम करने के इरादे से दो गुटों के बीच भिड़ंत शुरू हो गई, जिसमें एक व्यक्ति मारा गया. उसी रात नल पर पानी लेने गई एक 60 वर्षीय महिला को गोली मार दी गई. इलाज एसएनएमएमसीएच में चल रहा है. घटना की इंक्वायरी पूरी भी नहीं हुई थी कि गोलियों की गूंज से कतरास दहल उठा. वहां मनोज यादव नामक कोयला कारोबारी को बाइक सवार अपराधियों ने गोलियों से भून डाला. हालत यह है कि दहशत के मारे वहां के लोग मुंह भी नहीं खोल रहे हैं.
बादशाहत की जंग के बीच गैंगस्टर प्रिंस की धमकी
झरिया और कतरास में वर्चस्व की इस लड़ाई के बीच गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गों की धमकी कोढ़ में खाज की तरह लोगों को परेशान कर रही है. गुर्गे मेजर का नाम लेकर खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि छोटे साहब (प्रिंस खान) की बात नहीं मानी तो यही हस्र होगा. झरिया के दो प्रसिद्ध घराने रघुकुल और सिंह मेंशन के बीच तकरार के साथ गोलियों व बम के धमाकों ने लोगों की नींद उड़ा दी है. इस बहाने अपराधी भी सिर उठाने लगे हैं और वर्चस्व के संघर्ष की बहती गंगा में हाथ धोने को तैयार रहते हैं. गैंगस्टर प्रिंस खान व उसके गुर्गों पर लगाम लगाने में पुलिस की विफलता भी आम लोगों को डरा रही है. शहर के लोगों लिए इस अशांति के बीच जीने की मजबूरी उनकी नियति बन चुकी है.
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