
*धनबाद :* अंग्रेजों के जमाने का धनबाद में देश का पहला डायमंड क्रॉसिंग अब इतिहास के पन्नों में अंकित हो गया है. इसके कुछ अवशेष धनबाद में है. जबकि बाकी हटा लिया गया है. यह डायमंड क्रॉसिंग धनबाद के गौरव से जुड़ा हुआ था और लोग बड़े गर्व से कहते थे कि डायमंड क्रॉसिंग हमारे धनबाद में है. बुजुर्ग लोग बताते हैं कि दूसरे शहर में रहने वाले सगे- संबंधी जब धनबाद आते थे तो एक बार डायमंड क्रॉसिंग देखने जरूर जाते थे.
*कम जगह में क्रॉसिंग बनाकर चलाई जाती थी ट्रेनें*
उन लोगों की इच्छा होती थी कि आखिर इसका नाम डायमंड क्रॉसिंग क्यों पड़ा.आपको बता दें कि कम जगह में क्रॉसिंग (एनएफ) बनाकर चारों तरफ के ट्रेनों की आवाजाही करने के लिए अंग्रेजों ने यह व्यवस्था बनाई थी. उस समय ना रेल लाइनें इतनी अधिक थी और ना रेल पर यात्रियों का इतना बोझ था. धीरे धीरे लाइने बढ़ती गई ,अलग-अलग रूट के लिए अलग-अलग लाइन हो गई, उसके बाद डायमंड क्रॉसिंग का औचित्य समाप्त होने लगा. फिर इसे वहां से हटा लिया गया. अब फिर एक बार यह मांग उठने लगी है कि जिस जगह पर डायमंड क्रॉसिंग था ,उस जगह की घेराबंदी कर उसका नामकरण कर दिया जाये. जिससे वह यादगार बन जाए और देखने जाने वाले वहां जाकर देख सके कि हमारा डाइमंड क्रासिंग कैसा था.
*क्या कहते है धनबाद के लोग*
समाजसेवी मोहित ने कहा कि एक समय का वह डायमंड क्रॉसिंग धनबाद का केंद्र बिंदु था. सर्किल के रूप में आकार था, हम लोग उस समय कॉलेज लाइफ में थे ,देखने जाते थे. उन्होंने रेलवे और प्रशासन से मांग की कि संयुक्त रुप से बैठक कर उस जगह को यादगार बना दिया जाए, वहीं अजय कुमार कहते हैं कि धनबाद में डायमंड क्रॉसिंग का होना बहुत बड़ी बात थी. लोग सोचते थे कि आखिर डायमंड क्रॉसिंग होता क्या है लेकिन जब जाकर देखते थे तो उन्हें पता चलता था कि कम जगह में अधिक से अधिक ट्रेनों की आवाजाही कैसे हो सकती थी. इसकी व्यवस्था की गई है, धनबाद में देश का पहला डायमंड क्रॉसिंग था जिसे धरोहर के रूप में इसे पहचान मिलनी चाहिए.

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