
*(झारखंड डेस्क)*
रांची। झारखंड में सरकार द्वारा नियोजन की नई नीति हाई कोर्ट द्वारा खारिज के बाद सड़को पर युवाओं का विरुद्ध शुरू हो गया.अंततः हेमंत सरकार ने कहा कि युवाओं की समस्या के निराकरण के लिए सरकार वैकल्पिक व्यवस्था करेगी.इसी लिए युवा धैर्य से काम लें.

इस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में विधायकों का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला था. सीएम ने कहा कि एक साजिश के तहत राज्य के मूलवासी, आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को छिना जा रहा है.जिसे सरकार किसी कीमत पर विरोधियों की साजिश को पूरा होने नहीं देगी.

उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार राज्य में नियुक्तियों को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार कर रही है.
जल्द ही इसका सकारात्मक परिणाम सामने आयेगा। इस विधेयक में यह भी निवेदन था कि इसे नौंवी अनुसूची में डाला जाए, ताकि जिस तरीके से यहां मूलवासी-आदिवासियों के खिलाफ जो साजिश हो रही है, उसे खत्म किया जा सके. इसी विधेयक को जल्द से जल्द पारित करने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया, ताकि केंद्र सरकार के पास जल्द से जल्द इसे नौंवी अनुसूची में शामिल कर इस राज्य के नौजवानों के भविष्य को संरक्षित करने का काम हो सके.
सीएम ने कहा कि यह यहीं नहीं रुकेगी. उन्होंने राज्य के नौजवानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस सरकार का प्रयास कि राज्य के नौजवानों को अधिकार मिले. साथ ही कहा कि जो नियुक्तियों हैं, इन नियुक्तियों को लेकर सरकार वैकल्पिक व्यवस्था के प्रयास में जुटी है. कहा कि इस नियोजन नीति को लेकर राज्य के सात लाख से अधिक बच्चों ने आवेदन किया था. आज वो बच्चे काफी निराश और मायूस हैं. हमें इनकी चिंता है. बीजेपी को छोड़ कर सभी राजनीतिक दल के शिष्टमंडल राज्यपाल से मुलाकात की. इस शिष्टमंडल में जेएमएम, कांग्रेस, राजद, आरजेडी, सीपीएम, आजसू, वामदल समेत अन्य राजनीतिक दल के नेताओं ने शिरकत की. कहा कि राज्यपाल से भेंट करने का कारण पिछले दिनों झारखंड हाईकोर्ट द्वारा राज्य के नियोजन नीति को रद्द करना है.
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