
*हेमंत सरकार केंद्र सरकार से समन्वय बनाकर अन्नदाताओं को पहुंचाए राहत: जयंत सिन्हा*

सांसद हज़ारीबाग सह अध्यक्ष वित्त सम्बन्धी संसदीय स्थायी समिति श्री जयंत सिन्हा हज़ारीबाग व रामगढ़ के किसानों को हर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं। वर्ष 2023 में हुई अल्पवृष्टि के कारण हज़ारीबाग ज़िले के कई प्रखंडों के किसान गंभीर सूखे की मार झेल रहे हैं। अन्नदाताओं को राहत दिलवाने के लिए उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा से मुलाकात की है।

जयंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारे किसान भाई-बहनों का निरंतर उत्थान व विकास हो रहा है। जैसा कि आप जानते हैं मेरा संसदीय क्षेत्र हज़ारीबाग, झारखण्ड का एक विकासोन्मुख क्षेत्र है, जो तेज़ी से सर्वांगीण प्रगति की ओर अग्रसर है। मेरे संसदीय क्षेत्र के दो ज़िले हज़ारीबाग व रामगढ़ का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला इलाका है, जहाँ 70 प्रतिशत आबादी का जीवन-यापन कृषि पर निर्भर है।
मेरे क्षेत्र के किसानों को जहाँ एक तरफ मोदी सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों के किसान अल्पवृष्टि के कारण प्राकृतिक मार झेल रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार 2023 में हजारीबाग जिले के 6 प्रखंड गंभीर रूप से और 9 प्रखंड मध्यम स्तर पर सूखे से प्रभावित हैं। इस संबंध में उचित कार्रवाई व राहत हेतु जिला प्रशासन द्वारा एक रिपोर्ट राज्य को भेजी गयी है। इस रिपोर्ट के अनुसार यह सभी प्रखंड Trigger 2 में शामिल किए गए हैं। हालांकि वास्तविक स्थिति इससे कहीं ज्यादा गंभीर है।
पिछले कुछ समय में क्षेत्र के दौरौं के दौरान हज़ारों किसानों और कृषि संस्थानों ने मुझे अल्पवृष्टि के कारण हो रही तकलीफ के बारे में बताया है। हज़ारों किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि केंद्र की एक टीम भेजकर क्षेत्र की एक बार जांच कराई जाए ताकि कृषि भाई-बहनों को आवश्यक राहत प्राप्त हो सके।
जयंत सिन्हा ने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक है कि झारखंड सरकार ने राज्य में किसानों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष झारखंड के करीब 210 प्रखंड सूखे की चपेट में थे, जिसमें 9 प्रखंडों में गंभीर सूखा पड़ा था, इन प्रखंडों में 60% से भी कम बारिश दर्ज की गई थी। झारखंड के 200 से अधिक प्रखंडों में सूखे के बावजूद भी झारखंड सरकार ने खरीफ की फसल में हुए नुकसान के संदर्भ में केंद्र सरकार से सूखा राहत का दावा नहीं किया।
जयंत सिन्हा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि वे अविलंब इस गंभीर मामले पर कार्रवाई करें और केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित करते हुए हमारे अन्नदाताओं को राहत पहुंचाएं।
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