
सरायकेला खरसावां जिला के विभिन्न प्रखंड अंतर्गत गांव से शहर समेत पूरे क्षेत्र में माताओं ने अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना को लेकर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ *जीवित्पुत्रिका यानी जिउतिया व्रत* मनाया।
सुबह से ही क्षेत्र के विभिन्न बाजारों और गांवों में पर्व को लेकर चहल-पहल बनी रही। व्रती माताओं ने दिनभर निर्जला उपवास रखकर शाम को विधि-विधान के साथ जिऊतवाहन भगवान की पूजा-अर्चना की।

पर्व को लेकर शनिवार सुबह से ही मिलन चौक, तिरूलडीह, टीकर, ईचागढ़ सहित आसपास के बाजारों में इंख डाली खरीदने के लिए भीड़ देखी गई। व्रती महिलाओं के साथ उनके परिजन भी पूजा सामग्री की खरीदारी करते नजर आए। श्रद्धालुओं ने इंख डाली को श्रद्धापूर्वक घर लाकर आंगन में स्थापित किया और पूजा स्थल को सजाकर पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा की।

कई घरों में आंगन में कतारी गाड़कर उसके समीप सियार और गिद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके बाद महिलाओं ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर विधि-विधान से पूजा की। पूजा के दौरान जिउतिया व्रत से जुड़ी पारंपरिक कथा का विशेष महत्व रहा।
इस अवसर पर पंडितों ने व्रती महिलाओं को सियार और गिद्ध से जुड़ी जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनाई। कथा श्रवण के दौरान महिलाओं ने भगवान जिऊतवाहन का स्मरण करते हुए अपनी संतानों की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना की।
क्षेत्र में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा। गांवों में महिलाओं के समूह पूजा की तैयारियों में जुटे रहे, वहीं बाजारों में भी पर्व की रौनक दिखी। देर रात तक महिलाएं पूजा-अर्चना में व्यस्त रहीं। पूजा के बाद अपने बच्चों को अंकुरित चना एवं अन्य प्रसाद देकर और हाथ पर तागा बांधकर लंबी उम्र की कामना की।
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