
सरायकेला खरसावां जिला के ईचागढ़ थाना अंतर्गत टिकर गांव में जमीन को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। महज 100-200 फीट की दूरी पर थाना स्थित होने के बावजूद विवाद गहराता जा रहा है।
स्थानीय रैयतदारों का कहना है कि मौजा टिकर, खाता नंबर 583, प्लॉट नंबर 3816, कुल रकवा 24 एकड़ 80 डिसमील जमीन पर गांव के कुछ लोग निर्माण कार्य नहीं करने दे रहे हैं। रोजाना सैकड़ों की संख्या में रैयतदार और ग्रामीण आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे किसी भी समय खूनी संघर्ष की आशंका बनी हुई है।

रैयतदारों में क्षितिज कुमार महतो, मुचीराम महतो, सुग्रीव महतो और रंजीत कुमार साव शामिल हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वजों ने 14 सितंबर 1952 को ईचागढ़ राजा साहब से यह जमीन खरीदी थी। उनके पास दलील, खतियान और ऑनलाइन खजाना रसीद मौजूद है, जिसकी वैधता 13 अप्रैल 2026 तक दर्ज है।

रैयतदारों के अनुसार उन्होंने अंचल कार्यालय ईचागढ़ से जमीन की नापी भी करवा ली है तथा चांडिल अनुमंडल न्यायालय से भी उनके पक्ष में आदेश पारित है। इसके बावजूद स्थानीय कुछ लोगों द्वारा निर्माण में बाधा डाली जा रही है।
रैयतदारों का आरोप है कि ईचागढ़ थाना प्रभारी ग्रामीणों का साथ दे रहे हैं, जिस कारण वे अपना नियोजित निर्माण कार्य नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी रैयतदारों ने मिलकर उक्त जमीन मुंबई स्थित कंपनी ‘बज़िल प्राइवेट लिमिटेड’ को लीज पर दी है और अंचल अधिकारी ईचागढ़ ने कंपनी को ‘नो ऑब्जेक्शन’ प्रमाणपत्र भी निर्गत किया है।
आज प्रेस के सामने रैयतदारों ने चेतावनी दी कि यदि कागजात के आधार पर पुलिस प्रशासन सहयोग नहीं करता है तो वे संघर्ष के लिए मजबूर होंगे।
जब ईचागढ़ थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अंचल अधिकारी को जमीन की मापी करने का पत्र जारी कर दिया गया है और जल्द ही नापी करवा दी जाएगी।
स्थानीय रैयतदारों की मांग है कि अंचल कार्यालय से आधिकारिक मापी कराकर जिनके नाम खतियानी रैयत के रूप में दर्ज हैं, उन्हें जमीन का अधिकार तुरंत दिया जाए ताकि विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा हो सके।
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