
सरायकेला – समाचार सेवा मेहनत और एकाग्रता के बल पर सफलता के शिखर को कैसे छुआ जाता है, यह सरायकेला के शुभम कुमार पति ने साबित कर दिखाया है। अपनी शैक्षणिक यात्रा में निरंतर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक लगाने वाले शुभम को हाल ही में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

प्रारंभिक शिक्षा और दृढ़ संकल्प

शुभम ने अपनी शुरुआती शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला से प्राप्त की। दसवीं कक्षा तक इसी विद्यालय में पढ़ते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। शिक्षकों के अनुसार, शुभम बचपन से ही अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे हैं, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
स्वर्ण पदकों की हैट्रिक
शुभम की उच्च शिक्षा की यात्रा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) से शुरू हुई। यहाँ उन्होंने न केवल अकादमिक उत्कृष्टता हासिल की, बल्कि सफलता के नए कीर्तिमान रचे:
एम.ए. (अंग्रेजी): प्रथम स्वर्ण पदक हासिल किया।
बी.एड.: दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
एम.एड. (सत्र 2021-23): विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों अपना तीसरा स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
चांसलर मेडल और विशेष सम्मान
इसी सत्र में सभी स्नातकोत्तर विषयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘चांसलर मेडल’ से नवाजा गया। इसके साथ ही, उन्हें ‘सर्वोदय रत्न तुकाराम बोरकर पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
वर्तमान में शोध कार्य
वर्तमान में शुभम कुमार पति दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) के रूप में कार्यरत हैं। वे अभी “सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षण” (Culturally Responsive Pedagogy) विषय पर शोध कर रहे हैं। उनका यह शोध शिक्षा को वास्तविक सामाजिक संदर्भों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शुभम की इस उपलब्धि से पूरे सरायकेला क्षेत्र में खुशी की लहर है और वे युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं।
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