
अंतर्कथा प्रतिनिधि

झरिया। स्कूलों में ‘सीटी बजाओ, स्कूल बुलाओ’ अभियान शुरू करने का उद्देश्य छात्रों की उपस्थिति बढ़ाना और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों का दोबारा नामांकन कराना है।

शिक्षा सचिव के रविकुमार व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम के कार्यान्वयन की निगरानी कर रहे हैं।
इस अभियान के राज्य पदाधिकारी बादल राज को जिले में चलाई जा रहे ‘सीटी बजाओ, स्कूल बुलाओ’ अभियान की जानकारी दी जा रही है,
‘सीटी बजाओ, स्कूल बुलाओ’ अभियान के तहत स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के साथ-साथ आउट ऑफ स्कूल व ड्रॉप आउट बच्चों को भी स्कूल लाने का प्रयास किया जा रहा है.
जानकारी झारखंड शिक्षा परियोजना सरायकेला की फील्ड मैनेजर मोहम्मद अशफाक हुसैन ने दी।
प्रत्येक गांव में प्रत्येक बच्चे को एक सीटी प्रदान की जाती है और उसे 20 से 25 बच्चों को स्कूल लाने का काम सौंपा जाता है।
प्रत्येक गांव में एक नामित मॉनिटर के नेतृत्व में, स्कूल की वर्दी पहने छात्र सुबह 8 बजे स्कूल जाते समय सीटियाँ बजाते हैं।यह माता-पिता के लिए एक संकेत के रूप में कार्य करता है कि स्कूल खुला है, और उन्हें अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करता है।सीटी ग्रामीण क्षेत्रों में एक अलार्म के रूप में कार्य करती है, जो माता-पिता और बच्चों दोनों को स्कूल के लिए तैयार होने के लिए प्रेरित करती है।
यह अभियान स्कूल बंद होने जैसे बहानों पर अंकुश लगाने, छात्रों में जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने में प्रभावी साबित हो रही है जिन बच्चों को सीटी बजाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है उनमें मजबूत प्रबंधन और नेतृत्व कौशल भी विकसित होता है।
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