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विधायक जयराम महतो को मिली पीएचडी की उपाधि, नाम के साथ जुड़ा ‘डॉक्टर’, मां की मौजूदगी ने पल को बनाया बेहद खास

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Oct 3, 2026
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धनबाद: अपनी बुलंद आवाज़ और जन-आंदोलनों से पहचान बनाने वाले डुमरी के विधायक जयराम महतो ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि से सम्मानित किया गया है। अब उनके नाम के साथ एक नया गौरवशाली सम्मान ‘डॉक्टर जयराम महतो’ जुड़ गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष रही क्योंकि विश्वविद्यालय के इस दीक्षांत समारोह में उनकी मां स्वयं मौजूद थीं। जितिया पर्व के शुभ अवसर पर, जब मांएं अपने बच्चों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और तरक्की की प्रार्थना करती हैं, ठीक उसी दिन बेटे को डॉक्टर की डिग्री प्राप्त करते देखना मां के लिए अत्यंत भावुक और गर्व का क्षण रहा। मां ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे पूरे परिवार और संघर्ष के दिनों के लिए एक ईश्वर का आशीर्वाद बताया।

 

बचपन के संघर्ष से डॉक्टरेट तक का सफर…

 

अपनी इस सफलता पर डॉ. जयराम महतो ने जीवन के कठिन दिनों को याद करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने बताया कि बचपन में ही पिता और दादा-दादी का साया सिर से उठ जाने के बाद उनकी मां, नाना-नानी और मामा-मामी ने बेहद विकट परिस्थितियों में उनका लालन-पालन किया। लगभग 15-16 वर्षों तक वे अपने ननिहाल में रहे, जहां परिवार के हर सदस्य का एक ही सपना था कि वे पढ़-लिखकर अपने जीवन को संवारें।

उन्होंने कहा, “मेरे नाना जी निरक्षर थे और बीसीसीएल में कार्यरत थे। वे हमेशा कहते थे कि पढ़ाई न कर पाने का मलाल उन्हें जिंदगी भर रहा, इसलिए वे मुझे स्कूल छोड़ने और लिवाने खुद जाते थे। शुरुआती दिनों में सेना और पुलिस बहाली की कोशिशों में असफल होने के बाद मैंने उच्च शिक्षा का रास्ता चुना। कठिनाइयों के बावजूद गुरुजनों के मार्गदर्शन और दोस्तों के सहयोग से आज मैं इस मुकाम तक पहुंच सका हूं।”

 

“जनसेवा ही मेरी पहली प्राथमिकता”….

 

विधायक जयराम महतो ने आगे कहा कि अगर वे राजनीति में न होते तो शायद शिक्षक या प्रोफेसर बनकर सबसे पहले अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारते। लेकिन जनता ने उन्हें जो स्नेह, प्यार और जिम्मेदारी दी है, उसके कारण जनसेवा ही उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने इस पूरी सफलता का श्रेय अपनी मां के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और समर्थकों के आशीर्वाद को दिया।


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