
महाराष्ट्र : शरद पवार के पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के अगले दिन भी हलचल तेज है। बुधवार को पार्टी के आला नेताओं की बैठक हुई, जिसमें शरद पवार ने भी हिस्सा लिया। इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने शरद पवार के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ कई और पदाधिकारी भी इस्तीफा दे चुके हैं।
*‘महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाला है बहुत बड़ा बदलाव’*

शरद पवार द्वारा पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने की घोषणा के बाद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा, ‘… एनसीपी का अस्तित्व संकट में है, शरद पवार अपना प्रभाव खो रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है ..।’

*पढ़िए शरद पवार के इस्तीफे के बाद बने सियासी हालात, जानिए आगे क्या होगा*
शरद पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। अभी यह साफ नहीं है कि शरद पवार पार्टी के सर्वेसर्वा पद पर रहेंगे या नहीं, लेकिन इसके घटनाक्रम के पीछे की कहानी और आगे क्या होगा पर सभी की नजर है। शरद पवार की घोषणा के बाद अब आगे दो काम हो सकते हैं।
*क्या होगा यदि शरद पवार फैसला वापस ले लें अपना इस्तीफा*
इससे राकांपा के लिए कुछ नहीं बदलेगा क्योंकि उसके लिए शरद पवार ही सब कुछ रहे हैं और वही फिर इस स्थिति में बने रहेंगे। यह संदेस भी जाएगा कि अब पवार के खिलाफ साजिश रचने वालों, असंतुष्टों और राजनीतिक दुश्मनों के सहयोगियों का एक भी गलत कदम उन पर खासा भारी पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अजीत पवार के अंतिम सांस तक पार्टी में बने रहने के बयान के बावजूद राकांपा में विभाजन के कयास खत्म न होने पर पवार इसी प्रकार का बड़ा प्रभाव चाहते थे।अजीत ने जब कार्यकर्ताओं को इस्तीफे का फैसला स्वीकार करने के लिए मनाने का प्रयास किया तो उन पर अविश्वास का भाव भी दिखा। कार्यकर्ता चाहते थे कि सुप्रिया सुले बोलें और अपने पिता से भी आग्रह करें। हालांकि अजीत के मना करने पर सुप्रिया नहीं बोलीं।
*क्या होगा यदि शरद पवार इस्तीफा देने पर अड़े रहें*
ऐसे में राकांपा को नया नेता चुनना होगा। अजीत ने कहा कि वह अध्यक्ष पद के इच्छुक नहीं हैं। क्या सुप्रिया चुनी जाएंगी या कोई और? यदि पवार कार्यकारी अध्यक्ष पर पूरा नियंत्रण रखेंगे और राजनीतिक गतिविधियों, रणनीति बनाने व प्रचार में भाग लेंगे तो महाविकास आघाड़ी को भी अति आवश्यक चुनावी संबल मिलेगा।
वहीं राष्ट्रीय राजनीति में पवार के कद पर कोई विशेष अंतर नहीं पड़ेगा कि वह राकांपा प्रमुख हैं या नहीं। यदि राकांपा का नया नेता उनकी सलाह नहीं मानता है तो वह जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकते हैं।
*कांग्रेस ने पवार के इस्तीफे को बताया राकांपा का अंदरूनी मामला*
इस बीच, राकांपा अध्यक्ष पद से शरद पवार के इस्तीफे को कांग्रेस ने पार्टी का अंदरूनी मामला बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि पवार देश के सम्मानित राजनेता हैं। सभी दलों में उनका सम्मान है पार्टी के अंदरूनी मामले में हमारा दखल देना सही नहीं है। वहीं कांग्रेस के महासचिव तारिक अनवर ने कहा कि जहां तक मैं जानता हूं, पवार बिना सोचे-समझे कोई निर्णय नहीं लेते हैं। उन्होंने निश्चित ही भविष्य की योजना तैयार कर ली होगी।
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