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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश ने सरकार की नई स्थानीय और नियोजन नीति को लटकाने, भटकाने और अटकाने वाला विधेयक बताया

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ByAdmin Office

Nov 12, 2022

 

हेमंत सोरेन सरकार ने आज विधानसभा में स्थानीय और नियोजन नीति के विधेयक को पास कर दिया. परंतु प्रदेश भाजपा अब भी इस पर सवाल उठा रही है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश ने सरकार की नई स्थानीय और नियोजन नीति को लटकाने, भटकाने और अटकाने वाला विधेयक बताया है. कहा कि भारतीय जनता पार्टी राज्य गठन के पूर्व से ही जन भावनाओं के साथ खड़ी है. स्व अटल बिहारी वाजपाई एवम लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में झारखंड राज्य का गठन हुआ. भाजपा ने अलग राज्य के सपनों को साकार किया जबकि आज के सत्ताधारी दलों ने कैसे अलग राज्य के आंदोलन को बदनाम किया, बेचा और खरीदा, यह जनता जानती है. आज भ्रष्टाचार में आकंठ डुबी सरकार, आरोपों से घिरे मुख्यमंत्री एवं उनके कुनबे को 32महीनों के बाद 1932 के खतियान की याद आ गई. मुख्यमंत्री ने फिर एक बार फिर राज्य की जनता को दिग्भ्रमित किया है. इनकी मंशा साफ नहीं है. ये सिर्फ दिखावा करना चाहते हैं. इनके नियत में खोट है. राज्य सरकार को स्थानीय नीति, नियोजन नीति बनाने, लागू करने का पूरा अधिकार भारत के संविधान ने दिया है फिर 9 वीं अनुसूची की बहानेबाजी क्यों हो रही. इससे यह स्पष्ट हो चुका है कि हेमंत सोरेन सरकार की मंशा साफ नहीं है.

संकल्प लाकर हो नीति की घोषणा

दीपक प्रकाश ने कहा कि जैसे भाजपा की पूर्व सरकार ने संकल्प के आधार पर स्थानीय नीति और नियोजन नीति को परिभाषित करते हुए लागू किया था, उसी तर्ज पर हेमंत सरकार भी बहाने बाजी छोड़ स्थानीय नीति और नियोजन नीति लागू करे. हेमंत सरकार का आदिवासी, दलित,पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है. विधेयक में अनुसूचित जाति का उल्लेख तक नहीं है. ऐसे ही अपनी परंपरा संस्कृति का पालन करने वाला जनजाति समाज विकास की बाट जोह रहा है. दीपक ने सीएम से उनके मंत्रिमंडल में हो, मुंडा, आदिम जनजाति समाज के लोगों की भागीदारी पर भी सवाल पूछा है.

पिछड़ा विरोधी है कांग्रेस
दीपक प्रकाश ने कहा कि आज जिस कांग्रेस की गोद में बैठकर हेमंत सोरेन सरकार चला रहे, उसी कांग्रेस ने 10वर्षों तक मंडल कमीशन रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था. पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक अधिकार नहीं दिया था.

आज ये लोग पिछड़ों की हितैषी बनने का नाटक कर रहे. पिछड़ों के आरक्षण संबंधी बिल भी दिखावा है. राज्य सरकार को यदि पिछड़ों की इतनी ही चिंता थी तो फिर बिना आरक्षण दिए पंचायत चुनाव क्यों कराए गए और अब नगर निकाय चुनाव कराने की भी बात बिना आरक्षण के ही हो रही. आखिर यह कैसी सोच है. स्पष्ट है कि राज्य सरकार की नियत और नीति दोनो में खोट है.

मोदी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया. आज केंद्रीय मंत्रिमंडल में सर्वाधिक मंत्री पिछड़ा समाज के हैं. भाजपा जो कहती है, वही करती है.


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