
*अंतर्कथा ब्यूरो*

पटना: राज्य में किसानों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) देने में अभी तक की प्रगति संतोषजनक नहीं है। किसान बहुत उम्मीद के साथ ऋण के लिए बैंकों में आवेदन करते हैं और बिना उचित कारण के उसे अस्वीकृत कर दिया जाता है। यह स्थिति अशोभनीय है।

लोकसभा चुनाव हाल ही में खत्म हुआ है। देश में अब सरकार भी बन गई है। इस बीच बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता मंगल पांडेय अचानक खफा हो गए। उन्होंने एक समस्या को लेकर नाराजगी भी जताई। अपनी समस्या को लेकर उनहोंने एक बैठक भी बुलाई। इसके साथ अधिकारियों को किसानों की मदद के लिए एक आदेश भी दे दिया है।
कृषि मंत्री मंगल पांडे ने गुरुवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन सभागार में राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की कृषि एवं उससे संबद्ध विषयों की उप समिति की बैठक में कही। कृषि मंत्री ने बैठक में आवेदन पत्र का प्रारूप हिंदी में एवं सरल बनाने की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया।
उन्होंने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आवेदक किसान को आवेदन करने में कोई कठिनाई नहीं हो। इसके साथ ही, बैंक भी अपने स्तर से आवेदन भरने में किसानों की मदद करें।
उन्होंने कहा कि सभी बैंक अधिक-से-अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराएं। केसीसी देने के बाद किसानों से लगातार संपर्क स्थापित कर उन्हें राशि ससमय वापस करने के लिए प्रोत्साहित भी करें, ताकि किसानों को कृषि ऋण पर ब्याज अनुदान का लाभ प्राप्त हो सके।
बैंकों को किसानों के हित में कार्य करना पड़ेगा- मंगल पांडेय
उन्होंने कहा कि किसान जानकारी के अभाव में समय पर राशि वापस नहीं कर पाते हैं, जिससे वे ब्याज पर अनुदान के लाभ से वंचित हो जाते हैं। बैंकों को किसानों के हित में कार्य करना पड़ेगा एवं इसका परिणाम सामने आना चाहिए।
दूसरे राज्यों के किसानों को बैंकों से काफी लाभ मिलता है। इसकी तुलना में बिहार के किसानों को बैंकों से समुचित लाभ नहीं मिल पाता है। इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
इस दौरान कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने बैंकों को नए केसीसी लाभार्थी किसानों की सूची उपलब्ध कराने का निदेश दिया। बैठक में नाबार्ड के उप महाप्रबंधक प्रकाश कुमार मिश्रा, आरबीआई, बिहार राज्य सहकारिता बैंक लिमिटेड, विभिन्न वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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