
डुमरी:बगोदर के भाकपा माले विधायक बिनोद सिंह को मंगलवार को मिले उत्कृष्ट विधायक सम्मान पर
माले के अनुषांगिक इकाई इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष संदीप जयसवाल ने अपना विचार व्यक्त
करते हुए कहा कि विधायक बिनोद सिंह ने राज्यपाल के हाथों सम्मानित होने के बाद अपने सम्बोधन में जो बातें कही उससे यह लगा कि क्यों चयन समिति ने कॉ बिनोद सिंह को उत्कृष्ट विधायक चुना।

अपने संक्षिप्त उद्बोधन में सभी पहलुओं को छुआ।उन्होंने सम्मान के लिए बगोदर विधानसभा की जनता,साथियों,मीडिया कर्मियों,मित्रों व बुद्धिजीवियों को यह सम्मान समर्पित किया।उन्होंने आगे राज्यभर के आंदोलनों व सड़कों के संघर्षों का भी जिक्र किया और बताया कि उन आंदोलनों व संघर्षो के सवालों को उठाने की वजह से ही वे उत्कृष्ट चुने गए।उन्होंने राज्य भर के मीडिया कर्मियों का भी आभार ब्यक्त किया कि वो उन सवालों को प्रमुखता से प्रकाशित व प्रदर्शित करते रहे हैं,अपने विधानसभा के पहले सवाल का जिक्र किया कि कैसे जब वो पहली बार 2005 में विधायक चुने गए थे तो घाटशिला के उन 3 आदिवासियों का मामला उठाया था कि जिस ब्यक्ति की हत्या ही नही हुई थी उस आरोप में वो तीनों जेल में थे।उस सवाल को उठाने के पहले वो कैसा महसूस कर रहे थे एवं जिनका सहयोग मिला उन्होंने उसका भी जिक्र किया।उन्होंने एक मुखबिर युवक का भी जिक्र किया कि कैसे एक ही नाम होने के कारण उनको छः माह की जेल की हवा खानी पड़ी पड़ी जिसे विधानसभा में उठाया।जबकि आदिवासी युवक की हत्या का जिक्र भी उन्होंने किया जबकि ऐसे कई अनगिनत मुद्दें हैं जिसे उन्होंने गिनाया नहीं लेकिन उनके द्वारा उठाये गए जनपक्षीय सवालों का झारखंड विधानसभा व राज्य की सवा तीन करोड़ जनता इस बात की गवाह है।

श्री सिंह ने कहा कि कल मैं विधायक रहूं या न रहूं विधानसभा को और भी जनता के प्रति उत्तरदायित्व बनाया जाय,इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए।उन्होंने आगे बताया कि कैसे आज भी आजादी के 75 साल व राज्य गठन होने 22 साल के बाद भी प्रखंडों व अंचलों की कार्य संस्कृति जनता को संतुष्ट नही कर रही है।उन्होंने इस मौके पर अपने पिता व पूर्व विधायक महेंद्र सिंह को याद करते हुए कहा कि कैसे सामान्य शिक्षा के बावजूद वे पढ़ने-सीखने के अभिरुचियों के कारण विधानसभा के अंदर व बाहर अपनी विशिष्ट पहचान बनायी और आज सोशल मीडिया के जरिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर या काटकर या मिथ्या फैलाया जा रहा है लेकिन हमें भी पढ़ने-सीखने का माहौल राज्य के अंदर बनाना होगा और इसलिए उन्होंने इस सम्मान में मिले राशि को अपने विधानसभा (बगोदर) क्षेत्र के कॉलेजों के पुस्तकालयों के लिए देने की बात कही।कॉमरेड विनोद सिंह का आचरण-ब्यवहार निश्चित रूप से बाकी जनप्रतिनिधियों के लिए अनुकरणीय है।
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