
अंतर्कथा प्रतिनिधि

पुटकी। करकेंद पारबाद पुल के समीप श्रीश्री बजरंग बलि मंदिर के 25वें प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर 9 दिवसीय श्रीमद भगवत कथा ज्ञान सप्ताह के प्रथम दिन श्रीमद् भागवत पूजन व्यास श्री बृजेश जी महाराज के पूजन प्रधान जजमान पूजा समिति अध्यक्ष रंजीत सिंह के द्वारा पूजन करने के बाद कथा प्रारंभ हुआ। बृजेश जी महाराज ने कहा कि बड़े से बड़ा पापी भी भागवत कथा सुनकर पापों से मुक्त हो जाता है। मन को शुद्ध करने के लिए भागवत से बड़ा दुसरा साधना कोई नहीं है महराज श्री ने कथा में बताया माता पिता की सम्पत्ति बच्चों के काम नहीं आती बल्कि माता पिता ने अपने बच्चों को जो संस्कार दिये है वही उनके काम आते है। उन्होने धुन्धकारी की कथा सुनाते हुए बताया कि धुन्धकारी मरने के बाद प्रेत बनकर भटकता रह गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं हुई अन्त में भागवत कथा से ही उसको मुक्ति की प्राप्ति हुई।
उन्होने भगवान के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया भगवान के रूप अनेक हो सकते हैं पर भगवान का स्वरूप अनंत है जिनका नाम लेने मात्र से जीवों को आनंद की अनुभूति होती है जो दुख से छुटकारा चाहता है वो भगवान को हर समय प्रणाम करता रहे। भागवत कथा में भगवान के 24 अवतारो का सुन्दर वर्णन हुआ एवं कथा के अन्त में लक्ष्मी नारायण की सुन्दर झांकी का दर्शन करके सभी भक्त प्रेम की मस्ती में झूमते रहे।
आयोजन को सफल बनाने में पूजा समिति के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा,उदय तिवारी, भोला शर्मा, गोपाल प्रसाद, नरेश भारती, दिलीप सिंह, राजेश भारती, सुभाष पासवान, कमलेश तिवारी व अन्य का साराहनीय योगदान है।

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