
अंतर्कथा :संवाददाता नरेश विश्वकर्मा
धनबाद/निरसा।शिवलीबाड़ी के जामा महजिद में रविवार को एक बैठक की गई इस बैठक में क्षेत्र के सभी इमाम एवं अवाम शामिल हुऐ जहां उपस्थित सदस्यों ने यह राय मशवरा किया कि इस्लाम धर्म के अनुसार जो भी निकाह होंगे उस निकाह में ना बाजा ना आतिशबाजी की जायेगी एवं रात्रि 11 बजे तक निकाह हो जाना चाहिए अन्यथा निकाह अगर किसी कारण वश देरी हुई तो निकाह अगले दिन सुबह फजर के नमाज के बाद निकाह पढ़ी जाएगी ।
अगर इस कानून को नही माना गया तो जो भी दोषी पाऐ जाएगे उनपर कमेटी द्वारा ₹ 5100/- का जुर्माना एवं कमेटी से माफी मांगने की बात कही गई हैं जब इस मुद्दे पर हमने शिवलीबाड़ी जामा महजिद के इमाम मौसूद अख्तर कादीर से बात की तो उन्होंने बताया कि आज के इस फैशन के दौर में शादी विवाह में
लोग अपने दिखावे के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च करते हैं और हमारा इस्लाम यह कभी नहीं कहता है कि शादी विवाह में गाजे बाजे एवं आतिशबाजी में फिजूल खर्च करें ।

इस कानून को लागू करने को लेकर सभी के साथ बैठक की गई हैं और सभी का विचार विमर्श से यह निर्णय हुआ कि यह कानून दो दिसम्बर जुम्मे के दिन से लागू हो जाऐगा जिनकी भी लड़के एवं लडकिया का निकाह हो तो अपने रिश्तदारों को सूचित कर दे कि यह नियम लागू हो चुका है और इस नियम के तहत निकाह होगी अन्यथा समाज द्वारा दण्ड का प्रवधान लागू हो गया हैं अक्सर यह पाया गया है कि शादी विवाह के दौरान बराती के द्वारा उद्दंडता की जाती है इन तमाम बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है जिससे निकाह में फिजूल के खर्चो से बचा जा सके इस बैठक में निरसा क्षेत्र के 14 महजिदो के इमाम सदर सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे और सभी ने इस कानून को पारित किया हैं जो कि अगले जुम्मे से लागू हो जायेगी।

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