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फिर चला झरिया में नगर निगम का अतिक्रमण मुक्त अभियान…

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Byadmin

Aug 6, 2026
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धनबाद: कोयलांचल के झरिया में नगर निगम अब पूरी तरह से ‘फॉर्म’ में आ चुका है। सड़कों पर फैला अतिक्रमण और बेतरतीब ट्रैफिक व्यवस्था से त्रस्त झरियावासियों के लिए धनबाद नगर निगम के झरिया अंचल की इंफोर्समेंट टीम ने एक ऐसा ‘विशेष अभियान’ चलाया है, जिसे देखकर दुकानदारों की सांसे अटकना लाजमी है। निगम की टीम ने साफ कर दिया है कि अब झरिया में नियमों की अनदेखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी!

 

गांधी रोड से बाटा मोड़ तक चला ‘सफाई-डंडा’…

 

झरिया के व्यस्त इलाकों—गांधी रोड, बर्तन पट्टी, जूता पट्टी और बाटा मोड़ से टेम्पो स्टैंड तक निगम की इंफोर्समेंट टीम ने धुआंधार निरीक्षण किया। इस दौरान दुकानदारों को दो टूक निर्देश दिया गया कि अपनी दुकानें तुरंत सड़क से पीछे हटाएं।

नालियों पर किया गया अतिक्रमण तत्काल प्रभाव से हटाएं। नालियों के ऊपर सुरक्षित जाली लगाना अनिवार्य है।

 

“ट्रेड लाइसेंस है या नहीं?” निगम का कड़ा सवाल…

 

सिर्फ अतिक्रमण ही नहीं, बल्कि कारोबारियों के कागजातों की भी जमकर जांच की गई। अभियान के दौरान सभी दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों को सख्त हिदायत दी गई कि वे बिना किसी देरी के अपना ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य रूप से बनवा लें। चेतावनी दी गई कि सार्वजनिक रास्तों और सड़कों पर सामान फैलाना अब जेब पर भारी पड़ेगा।

 

मैदान में उतरे अधिकारी, दिए कड़े निर्देश…

 

इस विशेष अभियान की कमान संभाले नजर आए फूड इंस्पेक्टर अनिल सर, जिनके साथ इंफोर्समेंट टीम और स्वच्छता पर्यवेक्षक संजर आलम समेत धनबाद नगर निगम की पूरी फौज मुस्तैद रही। निरीक्षण के दौरान स्वच्छता पर्यवेक्षक संजर आलम ने व्यापारियों और आम नागरिकों से बड़े ही दो टूक अंदाज में अपील करते हुए कहा कि अपने घरों और दुकानों का कचरा सड़क पर फेंकने की आदत छोड़िए! झरिया को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाना है, तो निगम के नियमों का पालन करना ही होगा। उन्होंने दोटूक चेतावनी देते हुए यह भी साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक ट्रेलर था।भविष्य में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाया जाएगा और दोषी पाए जाने पर तगड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

झरिया को चमकाने और यातायात को पटरी पर लाने के लिए नगर निगम का यह रुख यह साफ बयां करता है कि अब प्रशासन ढीली रवैये के मूड में बिल्कुल नहीं है। देखना यह है कि निगम की इस सख्ती के बाद व्यापारी कितनी जल्दी अपनी आदतें बदलते हैं।


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