
पटना के आदर्श केंद्रीय कारा, बेउर जेल की सुरक्षा में चूक हुई जिसका लांभ उठाकर कैदी ने बाहर भगा। जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई। शराब मामले में बंद महेंद्र यादव (42) कचरे के ढेर में छिप कर जेल से निकल गया।
जेल प्रशासन ने इसकी जानकारी बेउर थाने की पुलिस को नहीं दी। काफी देर तक मामले को दबाए रखा और वहां तैनात सिपाही स्वयं कैदी की तलाश में जुट गए।

करीब तीन घंटे बाद महेंद्र बेउर जेल मेन रोड पर बीएसएपी क्वार्टर के समीप झाड़ियों में छिपा मिला। इसके बाद उसे जेल में लाया गया। जेल अधीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जेलर, हवलदार समेत चार पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण की मांग की गई है।

वहीं, गेट वार्डन, तलाशी में लगे सिपाही, जेल इंचार्ज, वार्ड प्रभारी (जिस वार्ड में महेंद्र रहता था) समेत पांच को निलंबित कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो सुबह की गिनती में एक कैदी कम मिला, जिसके बाद उसकी खोज शुरू हुई। जेल प्रशासन ने साढ़े नौ बजे तक गिनती रिपोर्ट नहीं तैयार की थी। महेंद्र के विरुद्ध बेउर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
*भागने के लिए कचरे के ढेर के पास जाकर छिप कर रात गुजारी।*
सूत्रों की मानें तो रात की गिनती के बाद महेंद्र वार्ड से किसी तरह निकलने में सफल हो गया। वह पहरेदारों की नजरों से बचते हुए कचरे के ढेर के पास जाकर छिप गया। बताया जाता है कि जहां वह छिपा था, वहां रूमाल रख कर भी कोई व्यक्ति ज्यादा देर तक खड़ा नहीं रह सकता। मगर, महेंद्र ने वहीं रात गुजार दी।
भोर में करीब चार बजे कचरा उठाने वाला ट्रैक्टर जेल परिसर में आया। महेंद्र उसी में सवार हो गया और कचरे के अंदर छिप कर बैठ गया। पुरुषों के जेल से निकलने के बाद ट्रैक्टर महिला बैरक में भी गया था। बड़ा सवाल है कि यदि महेंद्र कचरे के ढेर में छिपा तो सफाईकर्मियों को ट्रैक्टर में कूड़ा रखते समय यह कैसे नहीं पता चला कि वे आदमी को भी रख रहे हैं? क्या महिला बैरक से महेंद्र उस पर सवार हुआ था तो वह महिलाओं के रहने वाली जगह में कैसे पहुंच गया? बताया जाता है कि निरीक्षण से पूर्व सफाई की जा रही थी।
जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही
जानकार बताते हैं कि रात्रि गिनती के बाद बैरक से किसी कैदी का बाहर जाना जेल प्रशासन की बड़ी चूक है। ऐसे में कोई दुर्दांत अपराधी भी मौके का फायदा उठा कर जेल को भेदने में सफल हो सकता है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले फुलवारीशरीफ एसडीपीओ मनीष कुमार ने जेल में प्रवेश करने के उपरांत कैदी वाहन की औचक जांच की थी, जिसमें भारी मात्रा में नशीले पदार्थ, मोबाइल और चार्जर बरामद हुए थे।
इस मामले में आधा दर्जन सिपाहियों पर कार्रवाई हुई थी। बेउर जेल में बंद अपराधियों की कई कांडों में भूमिका सामने आ चुकी है। वहां धड़ल्ले से मोबाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसके भी प्रमाण मिल चुके हैं। हालांकि, हाल के दिनों में जब भी जिला प्रशासन या पुलिस ने छापेमारी की तो अंदर से मोबाइल बरामद नहीं हुआ।
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