

निरसा- कुमारधुबी, बाघाकुडी,- अभिवाहक अपने बच्चों को स्कूल में तालीम लेने के लिए भेजते हैं स्कूल पहुंचते हैं


बच्चों का अभिभावक स्कूल के शिक्षक होते हैं छात्र छात्राओं का हर गतिविधियां पर शिक्षकों का विशेष नजर रहता है परंतु कुछ ऐसे भी हमारे समाज में शिक्षक हैं जिनके कारण पूरी शिक्षक जगत को शर्मशार कर रही है।

ताजा मामला निरसा 3 कुमारधुबी के बघाकुड़ी उर्दू मध्य विद्यालय की हैं जहां शिक्षक की ऐसी करतूत के कारण पूरा समाज शिक्षक पर दोषारोपण कर रहे हैं।छठी कक्षा में पढ़ने वाला तौसीफ अहमद प्रतिदिन की तरह अपना स्कूल गया था टिफिन के दौरान सभी बच्चे अपने टिफिन खा कर स्कूल में ही बच्चों के साथ खेल रहा था तभी तौसीफ के पाव नाली में जाते ही शीशा चुभ गया तथा गहरी जख्म हो
गया खून बहता रहा और दर्द से कहराता रहा परंतु फास्ट एड या किसी प्रकार की उपचार की कोई व्यवस्था नही की गई.घायल छात्र की लागतार खून बहाव होता रहा तभी कलाश टीचर मोहम्द अकबर साहब से बच्चे ने गुहार की सर काफी खून बह रहा हैं मुझे घर जाने दे या हमारे परिजनों को बुला दे शिक्षक ने एक ना सुनी तभी छात्र पीड़ा को सहन ना कर सका और स्कूल से घर आ गया और पूरी घटना के बारे में अपने परिजनों की बताया तभी परिजन ने गंभीर चोट को देखते हुए अपने बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल लेकर चले गए जब इस बात की सूचना स्थानीय पत्रकारों को मिला तो फोरन विद्यालय जा पहुंचा एवं शिक्षक मोहम्मद अकबर साहब से घटना के बारे में जानकारी लेना चाहता तो शिक्षक आग बबूला हो गए और मीडिया के कैमरे पर अपना हाथ मांरने लगे सभी बीच-बचाव करने आऐ एक और शिक्षक वहां उपस्थित हुए और मामला को शांत करवाया।
इससे साफ जाहिर होता है कि विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षक अपनी नाकामी छुपाने के लिए मीडिया के कैमरा पर टूट पड़े क्या एक शिक्षक को यह सब शोभा दिया जो कि मिडिया से ही उलझ पड़े।
अगर शिक्षण संस्थानों की यही रवैया रहे तो आज के नौनिहालों में उज्जवल भविष्य की कल्पना हम कैसे कर पाएंगे।
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