

कोयलांचल की धरती धनबाद, जो अपनी काली संपदा के लिए विश्व विख्यात है, इन दिनों एक अलग ही किस्म की गर्माहट महसूस कर रही है। यह गर्मी कोयले की खदानों से नहीं, बल्कि धनबाद के आसमान में ‘हवाई सपने’ दिखाने वाली राजनीति से पैदा हुई है। धनबाद एयरपोर्ट का मुद्दा, जो दशकों से ठंडे बस्ते में था, अचानक ‘सियासी रनवे’ पर उतर आया है। शुक्रवार को रणधीर वर्मा चौक से लेकर सर्किट हाउस तक दावों, प्रति-दावों और तीखे हमलों की ऐसी ‘फ्लाइट’ उड़ी कि आम जनता यह सोचने पर मजबूर है कि क्या वाकई धनबाद से विमान उड़ेगा या यह मुद्दा एक बार फिर ‘टेक-ऑफ’ से पहले ही क्रैश हो जाएगा।

भाजपा का ‘टेक-ऑफ’ मिशन: “राज्य सरकार दे जमीन, केंद्र देगा पंख”
शुक्रवार की सुबह रणधीर वर्मा चौक पर भगवा झंडों और नारों की गूँज ने शहर का पारा चढ़ा दिया। धनबाद सांसद ढुल्लू महतो के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा का सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार धनबाद को हवाई सेवा से जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार इस प्रोजेक्ट के सामने ‘स्पीड ब्रेकर’ बनकर खड़ी है।
सांसद ढुल्लू महतो ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “केंद्र धनबाद को उड़ान देना चाहता है, लेकिन राज्य सरकार जमीन मुहैया कराने में अड़ंगेबाजी कर रही है। रांची की फाइलों में धनबाद के सपनों को दबाया जा रहा है।” भाजपा का तर्क है कि यदि राज्य सरकार इच्छाशक्ति दिखाए, तो धनबाद के पास बुनियादी ढांचा तैयार करने की पूरी क्षमता है।
कांग्रेस का ‘हवाई हमला’: “जनसेवा नहीं, यह साख बचाने का स्वांग”
भाजपा का धरना अभी खत्म ही हुआ था कि कांग्रेस ने जवाबी हमला बोल दिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष सिंह ने प्रेस वार्ता कर भाजपा के इस प्रदर्शन को पूरी तरह ‘पॉलिटिकल ड्रामा’ करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि नगर निगम चुनाव और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा अपनी खोई हुई साख वापस पाने की कोशिश कर रही है।
संतोष सिंह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “जब केंद्र में आपकी सरकार है और धनबाद ने आपको सांसद दिया है, तो आप धरना किसके खिलाफ दे रहे हैं? असली मुद्दे धरातल पर हैं—बेरोजगारी, प्रदूषण और विस्थापन। लेकिन भाजपा जनता का ध्यान भटकाने के लिए आसमान की बातें कर रही है।”
निरसा विधायक का ‘फैक्ट चेक’: विजिबिलिटी रिपोर्ट और फाइलों का सच
इस पूरी बहस में सबसे बड़ा तकनीकी मोड़ तब आया जब निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने सर्किट हाउस में मीडिया के सामने दस्तावेजी सबूत पेश किए। उन्होंने भाजपा के दावों की हवा निकालते हुए कहा कि केंद्र सरकार खुद इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर नहीं है।
चटर्जी ने खुलासा किया कि वर्ष 2017 में एक प्रस्ताव जरूर आया था, लेकिन 2018 में विशेषज्ञों की एक टीम ने धनबाद की विजिबिलिटी रिपोर्ट को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था। विधायक ने दावा किया कि तब से आज तक केंद्र की ओर से राज्य को जमीन के लिए कोई नया आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बोकारो एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी राज्य की वजह से नहीं, बल्कि केंद्र के ‘पॉल्यूशन क्लियरेंस’ न मिलने के कारण अटका हुआ है।
निष्कर्ष: जनता की उम्मीदें और सियासत का शोर
नेताओं की इस ‘आरोपों वाली उड़ान’ के बीच धनबाद की सवा दो लाख की आबादी आज भी ऑटो, खटारा बसों और लंबी दूरी की ट्रेनों के भरोसे है। सवाल यह है कि क्या बरवाअड्डा हवाई पट्टी कभी कमर्शियल रनवे में तब्दील होगी?
फिलहाल, स्थिति यह है कि विकास की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं और राजनीति सड़कों पर उतरी हुई है। अब देखना यह होगा कि आने वाले चुनावों में जनता किसे ‘फ्लाइंग किस’ देकर सत्ता के गलियारों में भेजती है और किसे चुनावी रनवे से बाहर यानी ‘ग्राउंडेड’ कर देती है। धनबाद के आसमान में विमान उड़े न उड़े, ‘सियासी गड़गड़ाहट’ तो तेज हो चुकी है।
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