
सड़क पर वाहनों की पार्किंग का नजारा

*गरीबों पर गाज, रसूखदारों पर नहीं होती कार्रवाई, सड़कों पर चल रहे ढाबा-रेस्टुरेंट*

धनबाद: कोयलांचल मुख्यालय धनबाद में अतिक्रमण उन्मूलन अभियान धन उगाही का जरिया बन कर रह गया है. ठेला, खोमचा व झुग्गी-झोपड़ी वाले छोटे-छोटे गरीब दुकानदारों पर तो अभियान की गाज गिर रही है, लेकिन उन प्रतिष्ठानों के ख़िलाफ कोई कार्रवाई नहीं, जो आधी सड़क पर कब्जा कर अपना कारोबार कर रहे हैं, होटल-रेस्टुरेंट चला रहे हैं. हर आम व खास इससे रोज ब रू होता है.
सड़कें हुई चौड़ी, चलने लायक नहीं
हाल के वर्षों में यहां की सड़कें चौड़ी अवश्य हुई हैं, इसके बाद भी चलने लायक नहीं हैं. जिला प्रशासन व नगर निगम का अतिक्रमणकारियों के खिलाफ डंडा भी चलता है, लेकिन सिर्फ गरीबों के खिलाफ. रसूखदार धन देकर, बड़ी बड़ी पैरवी पर बच निकलते हैं. यह काम सालों से चल रहा है और चलता ही जा रहा है. पिछले एक दशक में कई डीसी, एसडीओ और नगर आयुक्त बदले, लेकिन सड़कों के अतिक्रमण की स्थिति वहीं है.
वर्षो से है एसडीएम बंगला के आगे अतिक्रमण
शहर के हीरापुर क्षेत्र में पुलिस लाइन से डीआरएम बिल्डिंग तक फल, सब्जी, फूल की दुकानों के साथ ठेले खोमचे भी लगाते हैं. कोर्ट आने वाले लोगों की गाड़ियां भी उसके आगे खड़ी हो जाती हैं. लगभग 30 फीट की सड़क 10 फीट में सिकुड़ जाती है. हटिया मोड़ से एडीएम बंगला तक सड़क के दोनों ओर फुटपाथ से लेकर कई बिल्डिंग की सीढ़ियां भी सड़क की जमीन पर बनी हुई है. फुटपाथ तो उजड़ता है, पुन: बस भी जाता, लेकिन सीढ़ियों को कुछ नहीं होता है. बिल्डिंग मालिकों को नोटिस भेजने के बाद सब कुछ मैनेज हो जाता है.
बैंक मोड़ में निगम खुद करता है अतिक्रमण
शहर के सबसे व्यस्त सड़क बैंक मोड़ में जेपी चौक से पेट्रोल पंप तक सड़क के दोनों ओर निगम पार्किंग की वसूली करता है. शांति भवन, राजेंद्र मार्केट, राठौर मेंशन, उर्मिला टावर, श्री लक्ष्मी कांपलेक्स, आदित्य विजन तक सड़कों से ही हर दिन पार्किंग शुल्क लिया जाता है. कई दुकानों का सामान, ठेले खोमचे सब सड़क पर ही रहते हैं. यहां के ज्यादातर बिल्डिंगों में पार्किंग की व्यवस्था तो है, लेकिन उसमें दुकानें चलती हैं. बिल्डरों ने पार्किंग की जगह ही बेच डाली है. यह बात निगम के अफसर भी जानते हैं, लेकिन बिल्डरों से भिड़ना उनके वश की बात नहीं है. स्टील गेट, सरायढेला, आईएसएम गेट, पुलिस लाइन, श्रमिक चौक हर जगह यही स्थिति है.
सिटी सेंटर की पार्किंग से नहीं हटी दुकानें
शहर के सीटी सेंटर के बेसमेंट में शुरू से दुकानें चल रही हैं. पूर्व नगर आयुक्त रमेश घोलप ने उसे तोड़ने की कोशिश की थी. दूसरे ही दिन उनका तबादला हो गया था. 2023 के मार्च महीने में वर्तमान नगर प्रशासक सतेंद्र कुमार ने जिओ मार्ट सहित 8 दुकानों को खाली करने का नोटिस थमाया था. उसके बाद बिल्डर कोर्ट चला गया. मामला अभी तक कोर्ट में है. बिल्डिंग के आगे छोटे बड़े वाहन अब भी खड़े हो रहे हैं. साथ में ठेके खोमचे भी लग रहे हैं.
सरदार पटेल नगर से भी नहीं हटा अतिक्रमण
मधुलिका कावेरी स्वीट्स से लेकर कैलाश अस्पताल के मोड़ तक सड़क के दोनों ओर दुकानदारों ने सड़क की जमीन का अतिक्रमण कर रखा है. ग्राहकों के खाने पीने के लिए कुर्सी टेबुल की व्यवस्था सड़क पर ही होती है. वहीं कई अपनी दुकान के सामने सड़क की जमीन पर लाकर रख देते हैं. बरटांड़ और स्टील गेट मुख्य सड़क की स्थिति भी ऐसी ही है. निगम की इनफोर्समेंट टीम सिर्फ कोरम पूरा करती है.
असर्फी अस्पताल के आगे सड़क अतिक्रमण की शिकार
8 लेन सड़क अभी पूरी तरह बन कर तैयार भी नहीं हुई है. पूरा होने में तीन माह का समय और लगेगा. इससे पहले ही सड़क अतिक्रमण की शिकार हो चुकी है. सबसे बड़ा अतिक्रमण असर्फी अस्पताल के सामने है. निगम ने विगत जून में इसे हटाने की कोशिश भी की थी. लेकिन मेवा खाने के बाद सब शांत हो गए. अस्पताल का जेनरेटर सड़क पर स्थापित र है. इतना ही नहीं, सड़क के दो लेन में बाइक, कार, स्कार्पियो व अन्य वाहन दिनभर खड़े रहते हैं. इसके अलावा कई अन्य दुकानें भी हैं, जिसने सड़क पर अतिक्रमण फैला रखा है.
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