
*2010 में एसएनएमएमसीएच में कैंसर इंस्टीट्यूट खोलने के लिए 1.50 करोड़ रुपए हुए थे आवंटित,12 वर्षो बाद भी यह योजना सिर्फ फाइलों में ही सिमटी*
*एसएनएमएमसीएच में कैंसर के लिए प्रशिक्षित पारा मेडिकल कर्मियों से भी लिया जाता है सिर्फ मरीजों की बीपी व बुखार जांचने का काम*

*धनबाद :* कैंसर की चपेट में 25 हजार मरीज, इलाज के लिए कर रहे बाहर का रूख, जिले में नहीं एक भी अस्पताल, डॉक्टर
धनबाद में कैंसर के 25000 मरीज हैं और इनमें से सबसे ज्यादा 60 प्रतिशत लोग माउथ कैंसर से जूझ रहे हैं। जिले में कोई कैंसर रोग विभाग और विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने की वजह से लोग इलाज के लिए बाहर जाते हैं।
जिले में प्रदूषण व अन्य कारणों से कैंसर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। जिले में करीब 25 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज हैं। इसके बावजूद जिले में न तो कोई कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही कोई कैंसर अस्पताल। वहीं, मजेदार बात यह है कि कैंसर जागरूकता के लिए यहां नन-कम्यूनिकेबल डिजीज (एनसीडी सेल) काम कर रहा है, जो लोगों के बीच जागरूकता कैंप लगाता है। साथ ही मरीजों के कैंसर की जांच भी करता है। मरीज मिलने पर इन्हें एसएनएमएमसीएच (शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) रेफर किया जा रहा है, लेकिन यहां विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर कर दिया जाता है।
*12 वर्षों में भी नहीं खुला कैंसर इंस्टीट्यूट :*
कैंसर को लेकर अधिकारी कितने उदासीन हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि एक दशक बाद भी जिले में कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना नहीं हो पाई है। वर्ष 2010 में एसएनएमएमसीएच में कैंसर इंस्टीट्यूट खोलने के लिए 1.50 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन 12 वर्ष बाद भी यह योजना सिर्फ फाइलों में ही है। अब यह राशि लौटने की नौबत आ चुकी है।
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*सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में विभाग ही नहीं*
स्टील गेट में 1.67 अरब रुपये की लागत से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण अंतिम चरण में है। वर्ष, 2023 में इसे खोलने की कवायद हो रही है, लेकिन यहां भी कैंसर रोग विभाग व विशेषज्ञ का कोई पद नहीं है। हालांकि, कालेज प्रबंधन ने अलग से कैंसर ब्लाक बनाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन यह पास नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत 63 चिकित्सक सेवा दे रहे हैं। इसमें सभी अन्य रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
*जिले में मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज :*
इधर, सदर अस्पताल के वरीय सर्जन डा. एस गोलाश का कहना है कि धनबाद में तेजी से लोग कैंसर से ग्रसित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा 60 प्रतिशत लोग माउथ कैंसर से पीड़ित हैं। माउथ कैंसर लगातार गुटका खाने की वजह से हो रहा है। अस्पताल में हर माह ऐसे सैकड़ों मरीज आ रहे हैं।
धनबाद में सिविल सर्जन डा. आलोक विश्वकर्मा कहना है कि, जिले में कैंसर रोग विभाग नहीं है और न ही इसके विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली राज्य स्तर से हो रही है। उम्मीद है कि जल्द ही चिकित्सक मिल जाएंगे। विभाग की कोशिश है कि लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सेवा मिले।
*धनबाद में कैंसर की चपेट में 25,000 मरीज :*
गौर करने वाली बात यह है कि धनबाद में कैंसर के 25,000 मरीज हैं, जो इलाज कराने के लिए दूसरे शहर जाते हैं। वहीं, एसएनएमएमसीएच में पारा मेडिकल कर्मियों को कैंसर रोग से संबंधित प्रशिक्षण दे बहाल तो कर दिया गया है, लेकिन पिछले 12 वर्षों से इनसे सामान्य मेडिसिन विभाग में काम लिया जा रहा है। यहां ये मरीजों का बुखार व बीपी नाप रहे हैं। जबकि इन्हें कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए प्रशिक्षण दिया गया था।
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