
सरायकेला : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी स्थित माकूलाकोचा चेकनाका के पास बने नए ट्यूरिज्म कॉटेज का उद्घाटन आज धूमधाम से किया गया। पर्यटन मंत्री सुजीत कुमार सोनू, ईचागढ़ विधायक सविता महतो और दलमा डीएफओ सवा आलम अंसारी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर कॉटेज का शुभारंभ किया।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दलमा को टूरिज्म हब के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने बताया कि T DC के 30 लोगों ने IHM मुंबई से ट्रेनिंग ली है। इन प्रशिक्षित लोगों को पर्यटन स्थल पर रोजगार मिलेगा। मंत्री ने कहा कि पर्यटकों के आने से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ होगा – चाहे वो एक बोतल पानी और बिस्कुट की खरीदारी ही क्यों न हो।

पर्यटन मंत्री सुजीत कुमार सोनू टूरिज्म से रोजगार बढ़ेगा। लोकल लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।”

लेकिन जब पत्रकारों ने मंत्री से हाथी-मानव संघर्ष के बढ़ते मामलों पर सवाल किया तो उनका जवाब विवादों में घिर गया। मंत्री ने कहा जंगल में घर बनाएंगे तो हाथी तो तोड़ेगा ही।”
मंत्री के इस बयान पर स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मंत्री को शायद यह जानकारी नहीं है कि हाथी अब दलमा गज परियोजना में नहीं हैं। जंगल की कटाई और बार-बार आग लगने के कारण दलमा सेंचुरी से हाथियों का झुंड पलायन कर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में डेरा जमा चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार करोड़ों खर्च कर टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, दूसरी तरफ सेंचुरी में हाथियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था नहीं है। नतीजा ये है कि आज दलमा सेंचुरी में वन्य प्राणी देखने को नहीं मिल रहे।
पर्यटक जंगल घूमने नहीं, हाथी-हिरण देखने आता है। अगर जंगल में जानवर ही नहीं होंगे तो कौन आएगा?”
ग्रामीणों का सवाल है कि टूरिज्म कॉटेज तो बन गए, लेकिन हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए सोलर फेंसिंग, खाई, फूड-प्लॉट और स्थाई निगरानी टीम जैसी ठोस पहल कब होगी?
कुल मिलाकर दलमा में टूरिज्म का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन सेंचुरी को बचाने और वन्यजीवों को रोकने की चुनौती अब भी बरकरार है।
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