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जलवायु-वातावरण परिवर्तन से होती हैं एलर्जिक बिमारियां

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Jul 8, 2023

 

मुकुंद साव*। चौपारण(हजारीबाग)
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वैश्विक स्तर पर कुल जनसंख्या के लगभग 26% लोग अलग-अलग प्रकार की एलर्जी से पीड़ित हैं. वहीं कुल पीड़ितों में से 50% लोग नाक या श्वसन तंत्र से जुड़ी कम या ज्यादा गंभीर एलर्जी की समस्या से पीड़ित होते हैं. वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, वातावरण में प्रदूषण के बढ़ने तथा अलग अलग कारणों से लोगों में अलग-अलग प्रकार की एलर्जी के मामलो की संख्या लगातार बढ़ रही हैं. जिनमें श्वसन तंत्र से जुड़ी एलर्जी राइनाइटिस तथा अस्थमा के मामलें काफी ज्यादा देखे जा रहे हैं. उक्त बाते आज विश्व एलर्जी दिवस के अवसर पर आयोजित स्वास्थ्य गोष्ठी में सामुदायिक अस्पताल चौपारण के प्रबंधन समिति के सदस्य सह सांसद प्रतिनिधि मुकुंद साव ने कहा,गोष्ठी की अध्यक्षता आंगनवाड़ी सेविका पूर्णिमा देवी ने किया जबकि संचालन स्वास्थ्य सहिया रीता देवी ने कहा,मौके पर कर्मियो को संबोधित करते हुए श्री साव ने कहा कि जानकारों की माने तो राइनाइटिस तथा अस्थमा जैसी एलर्जिक बीमारियों के बढ़ते मामले और उनमें भी गंभीर स्थिति वाले मामलों की बढ़ती संख्या भविष्य में गंभीर चिंता का कारण भी बन सकते हैं.वैसे तो एलर्जी कई प्रकार की तथा आनुवंशिक, पर्यावरण, आहार और संक्रमण सहित कई कारणों से हो सकती है. लेकिन ज्यादातर लोग श्वसन तंत्र, खाद्य, त्वचा एलर्जी व अन्य प्रकार की कई एलर्जी बीमारी होती है जिसके बारे में लोग ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं. ना सिर्फ आम जन में बल्कि कई बार पीड़ितों में भी एलर्जी के लक्षण,प्रभाव उनके निदान या उनके प्रबंधन को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं होती है जिसका सबसे बड़ा कारण उनमें जागरूकता का अभाव होता है, ऐसे में वैश्विक स्तर पर आमजन में विभिन्न प्रकार की एलर्जी संबंधी बीमारियों तथा उनसे जुड़े चिकित्सा संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल विश्व एलर्जी जागरूकता सप्ताह मनाया जाता है, ताकि लोग एलर्जी का शिकार न हो, मुकुंद साहब ने कहा की एलर्जी शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है जिसमें है नाक ,चमड़ी ,आंख ,फेफड़ों की मुख्य बीमारी है नाक की एलर्जी में नाक का बहना ,नाक बंद होना ,छींके आना, नाक में खारिश होना, आंखें लाल हो जाना, आंख में पानी आना, चमड़ी एलर्जी में खुजली होना, लाल हो जाना ,एक्जिमा होना ,खांसी ,सांस फूलना, और दमा होना शामिल है,इसलिए जलवायु परिवर्तन की स्थिति में,पर्यावरण दूषित होने की स्थिति में,स्थान परिवर्तन की स्थिति में मौसम परिवर्तन की स्थिति में एलर्जिक बीमारियां हो सकती है इसलिए इसमें जागरूकता जरूरी है,गोष्ठी में मुकुंद साव,पूर्णिमा देवी, रीता देवी,संगीता देवी,शारदा कुमारी वर्मा,सुनीता देवी,विमला देवी,पूनम देवी,मंजू देवी,अनिता देवी,सरस्वती देवी,सुंदर राणा,बिनोद कुमार साव,शशि कुमार सिंह सहित कई कर्मी ब अभिभावकगण उपस्थित थे,धन्यवाद ज्ञापन साक्षरता कर्मी मंजू देवी ने किया,


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