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ईचागढ़: थम नहीं रहा मानव-हाथी संघर्ष, हर सप्ताह हो रही मौत; अवैध बालू खनन बना भटकाव की बड़ी वजह

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Apr 26, 2026
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सरायकेला : ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हाथी समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि यहाँ लगभग हर एक सप्ताह मानव-हाथी संघर्ष में किसी न किसी की मौत हो रही है। हाड़ात गांव में मां-बेटी की मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर इसके पीछे जिम्मेदार कौन है?

 

*अवैध बालू खनन बना भटकाव का कारण:* समस्या के गहन अध्ययन में सामने आया है कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में स्वर्ण रेखा नदी के किनारे बसे वन क्षेत्रों के आसपास निरंतर हो रहा अवैध बालू खनन एवं परिवहन कहीं न कहीं हाथियों के भटकाव का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। रात-दिन चलने वाली जेसीबी, हाईवा और ट्रैक्टरों के शोर से हाथियों का प्राकृतिक कॉरिडोर बाधित हो रहा है।

 

बालू माफिया पर गंभीर आरोप: स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ हाथी समस्या का जिम्मेदार उन बालू माफियाओं को भी बताया जा रहा है जो गांव वालों को मोहरा बनाकर अपना गोरखधंधा चला रहे हैं। नदी किनारे अवैध खनन से हाथी रास्ता भटककर गांवों में घुस रहे हैं और उसका खामियाजा ग्रामीणों को मौत के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

 

वन विभाग पर दबाव की रणनीति:..सूत्रों के मुताबिक जब भी वन विभाग इस तरह के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश करता है, तब उन्हीं बालू माफियाओं द्वारा गांव वालों को आगे करके राजनीति की जाती है। हाथी समस्या के नाम पर वन अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और कार्रवाई रोकी जाती है।

 

*मासूम ग्रामीण बन रहे मोहरा:..?* परन्तु मासूम गांव वाले उन माफियाओं की नीयत को समझ नहीं पाते हैं और उनकी बातों में आकर उनका ही समर्थन करने को विवश हो जाते हैं। माफिया हाथी भगाने के नाम पर ग्रामीणों से उगाही भी करते हैं।

 

प्रशासन से कार्रवाई की मांग:..?सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि स्वर्ण रेखा किनारे हो रहे अवैध बालू खनन पर तुरंत रोक लगे। हाथी कॉरिडोर को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। जो अधिकारी माफियाओं से मिले हैं उन पर कार्रवाई हो। वरना ईचागढ़ में हर सप्ताह लाशें उठती रहेंगी और जिम्मेदार कोई नहीं होगा।


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