
अंतर्कथा प्रतिनिधि

जमुई झाझा-: आदिवासी समुदाय के हित के लिये अंग्रेजो के विरूद्ध संघर्ष,नेतृत्व और बलिदान संग सदा अन्याय के विरूद्ध पूरे समपर्ण के साथ लड़ने की प्रेरणा देने वाले महान क्रांतिकारी और आदिवासी नेता तिलकामांझी की 274वीं जयंती रविवार को वनवासी कल्याण आश्रम झाझा में मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालिका प्रसाद बरनवाल एवं मंच संचालन जितेंद्र आर्य के द्वारा किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने महान क्रांतिकारी नेता की जीवनी पर प्रकाश डाला। लोगों ने कहा कि आदिवासी समुदाय के हित के लिये अंग्रेजो के विरूद्ध उनका संघर्ष,नेतृत्व और बलिदान हमे सदा अन्याय के विरूद्ध पूरे समपर्ण के साथ लड़ने की प्रेरणा देता है। आगे वक्ताओं ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी तिलकामांझी का जन्म 11 फरवरी 1750 को बिहार के सुल्तानगंज में एक संथाल परिवार में हुआ था। उन्होने अंग्रेजो के ठेकेदारी प्रथा जो किसानो के खिलाफ था,उसका पुरजोर विरोध किया। तिलकामांझी के संघर्ष गाथा से हमे प्रेरणा लेनी चाहिये। अंग्रेजो के जुल्म के आगे उन्होनें कभी झुकने का काम नही किया बल्कि अंग्रेजी हुकुमत को उन्होनें हिलाने का काम किया। मौके पर ओमप्रकाश पासवान,नरेश लाल कर्ण,बमशंकर बरनवाल,बनारसी पासवान,राजकिशोर सिंह,विभीषण सिंह सहित कई लोग मौजूद थे।

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