
*भारत में पिछले 10 सालों से हर साल 27 नवंबर को ‘राष्ट्रीय अंग दान दिवस’ (National Organ Donation Day) मनाया जाता है. अंग दान दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरुक (Aware) करना और डेड बॉडी को स्वास्थ्य सेवा और मानव जाति में किए गए निस्वार्थ योगदान को पहचानना है. साथ ही मानवता में हमारे विश्वास को फिर से स्थापित करना है. पहली बार अंग दान दिवस साल 2010 में मनाया गया था. यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) द्वारा आयोजित किया जाता है।*

*भारत में अंगदान हमेशा से ही बहुत कम रहा है. अनुमान के मुताबिक, देश में प्रति मिलियन जनसंख्या पर केवल 0.65 अंगदान होते हैं, जबकि इसकी तुलना में स्पेन में 35 और अमेरिका में 26 अंगदान किया जाता है।*

*कोविड -19 के कारण आई अंग दान में भारी कमी*
कोविड -19 महामारी (COVID19 Pandemic) के कारण, पिछले कुछ महीनों में भारत सहित दुनिया भर में अंगदान में भारी कमी आई है. द लैंसेट नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि उच्च संक्रमण दर वाले देशों में अंग दान (Organ donation) में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई. खासकर मार्च में लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान 70 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली. महामारी के बीच, ज्यादातर लोग अस्पतालों में जाने से बचते रहे हैं जिसके कारण अंगदान और मुश्किल हो गया।
*अंगदान में कमी का कारण*
अंगदान में कमी का मुख्य कारण लोगों में दान की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी है. हांलाकि, कई गैर सरकारी संगठन और सार्वजनिक संगठन इस बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, फिर भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा इससे बेखबर है. अंग दान करने की इच्छा रखने वालों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होता है.
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