

केशव राव बलिराम हेडगेवार तत्कालीन ब्रिटिश राज सेदेश को मुक्त करवाने के लिए आजादी की लड़ाई से जुड़ गए. 1920 तक उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माध्यम से आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया. लेकिन उनका जल्दी ही कांग्रेस के सिद्धांतों और नीतियों से मोह भंग हो गया. 1923 में हुए साम्प्रदायिक दंगों के बाद हेडगेवार का मोह पूरी तरह कांग्रेस से खत्म हो गया और वे कांग्रेस के विकल्पों पर अपना ध्यान केन्द्रीत करने लग गए।*

वे मानने लग गए कि हिन्दू धर्म की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत ही इस देश का आधार है. इसी विचार को ध्यान में रखते हुए केशव राव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में दशहरा के दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की.*

*1940 में वे बिहार के राजगीर में संघ शिक्षा वर्ग के समारोह को सम्बोधित किया जो उनका आखिरी सम्बोधन था. उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि आज मैं अपनी आंखों के सामने हिन्दू राष्ट्र का लघु स्वरूप देख रहा हूं।*
*21 जून 1940 को नागपुर में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए. नागपुर के रेशम बाग में उनका अंतिम संस्कार किया गया।*
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