
*गुरु गोबिंद सिंह जी के इन विचारों ने मानवता के उद्धार में निभायी है बहुत हीं अहम भूमिका*
बैसाखी के दिन वर्ष 1699 में उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की। खालसा पंथ की रक्षा के लिए उन्होंने मुगलों से कई युद्ध किये। उन्होंने खालसा वाणी – “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” दी। उनके विचारों ने न केवल सिख पंथ में बल्कि मानवता के उद्धार में अहम् भूमिका निभाई। इस वर्ष 17 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाई जाएगी। पेश हैं उनके द्वारा कहे गए कुछ बेहतरीन मानवता को प्रेरणा देने वाले विचार –

1. हमें महान सुख और स्थायी शांति तभी प्राप्त हो सकती है जब हम अपने भीतर से स्वार्थ को समाप्त कर देते हैं।
-गुरु गोबिंद सिंह जी

2. परदेसी, लोरवान, दु:खी, अपंग, मानुख दि यथाशक्त सेवा करनी (अर्थ- विदेशी, दुखी, विकलांग और जरूरतमंद की मदद जरूर करनी चाहिए।)
-गुरु गोबिंद सिंह जी
3. अगर आप केवल अपने भविष्य के ही विषय में सोचते रहें तो आप अपने वर्तमान को भी खो देंगे।
-गुरु गोबिंद सिंह जी
4. धरम दी किरत करनी (अर्थ- अपनी जीविका ईमानदारीपूर्वक काम करते हुए चलाएं।)
-गुरु गोबिंद सिंह जी
5. किसी दि निंदा, चुगली, अतै इर्खा नै करना (अर्थ- किसी की चुगली व निंदा नहीं करनी चाहिए। किसी से ईर्ष्या करने के बजाय मेहनत करें।)
-गुरु गोबिंद सिंह जी
6. अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। अच्छे कर्म करने वालों की ही ईश्वर मदद करता है।
-गुरु गोबिंद सिंह जी
7. सत्कर्म कर्म के द्वारा, तुम्हे सच्चा गुरु मिलेगा और उसके बाद प्रिय भगवान मिलेंगे, उनकी मधुर इच्छा से, तुम्हें उनकी दया का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
-गुरु गोबिंद सिंह जी
8. असहायों पर अपनी तलवार चलाने के लिए उतावले मत हो, अन्यथा विधाता तुम्हारा खून बहाएगा।
-गुरु गोबिंद सिंह जी
9. स्वार्थ की भावना ही बुरे कर्मों के जन्म का कारण बनता है।
-गुरु गोबिंद सिंह जी
10. जो लोग भगवान के नाम का सिमरन करते हैं, वे ही जीवन में सुख-शांति पाते हैं।
-गुरु गोबिंद सिंह जी
*नोट:* यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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