
धनबाद
अवैध कोयले से गुलजार हैं बाघमारा के सैकड़ों चिमनी और बंगला ईंट भट्ठे सहित काला नमक फैक्ट्री जो करोड़ों की तादाद में ईंटों का निर्माण होता है,आखिर ईंटों की पकाई के लिए हजारों टन कोयला इन्हें किस नियम कानून के तहत मिलता है। प्रतिदिन हजारों साइकिल और मोटरसाइकिल से इन ईंट भट्ठों व काला नमक फैक्ट्री में कोयले की आपूर्ति की जाती है। ये सिलसिला दिनभर चलते रहता है।
*ये एक यक्ष प्रश्न है* पुलिस प्रशासन, खनन विभाग, वित्त विभाग बताए कि आखिर इन्हें कोयला कहां से और किस विधि से प्राप्त होता है। चोरी का कोयला और ऊपर से कर चोरी। धीरे धीरे सरकार के मुलाजिमों के सहयोग से लगभग सभी चिमनियां धुंआ उगलने लगी है।
*ये ईंट भट्ठेदार व काला नमक फैक्ट्री भी कम रसूख वाले नहीं हैं* कोई नेता है तो कोई बड़ा बिजनेसमैन और इनका मनोबल इतना बढ़ा हुआ कि क्षेत्र में कोई इनसे चूं-चपड़ भी नहीं बोल सकता।ऐसा इसलिए कि उनको स्थानीय थाना का संरक्षण प्राप्त रहता है। कोई ग्रामीण अगर उनके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे थाने में ला कर उसकी जमकर क्लास ली जाती है।
इन ईंट भट्ठे के कारोबार से क्षेत्र में खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी का सफाया हो रहा है । नमक फैक्ट्री से आसपास के इलाकों में पानी का स्वाद भी बदल गया है। लोगों को चिमनी व नमक फैक्ट्री के धुंए से प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।
पानी के लिए चिमनी वाले नदी और तालाब को बांध कर अपनी जरूरत पूरी करते हैं। कुछ चिमनी भट्ठा तो जीएम लैंड और वन भूमि पर अवस्थित है। जानकार सूत्र बताते हैं कि इस एवज में स्थानीय थाना को प्रतिमाह मोटी रकम दी जाती है। इन क्षेत्रों के चिमनी भट्ठा व ईट भट्ठे में अवेध कोयला खपाया जा रहा जा रहा है, महूदा थाना,राजगंज थाना, तोपचांची थाना, बाघमारा थाना, बरोरा थाना,रामकनली ओपी, तेतुलमारी थाना, ईस्ट बसुरिया थाना तथा नमक फैक्ट्री इन क्षेत्र में मधुबन थाना क्षेत्र , कतरास क्षेत्र ,जोगता थाना क्षेत्र में संचालित किया जा रहा है।कई ईंट भट्ठे तो एनजीटी के कायदे कानून की धज्जियां उड़ाते हुए संचालित है।*आख़िर इनपर लगाम कौन और कब कसेगा?* बाघमारा व पुटकी क्षेत्र के C O को संज्ञान में दिया जा रहा है अब देखना है आगे क्या होता है।

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