• Thu. Mar 5th, 2026

स्व. अमिताभ चक्रवर्ती की 72वीं जयंती मनाई गई: याद किए गए उनके कालजयी साहित्यिक अवदान

admin's avatar

Byadmin

Dec 17, 2025

 

​गोविंदपुर (धनबाद): हिंदी साहित्य के प्रखर कवि, प्रख्यात आलोचक और अपनी लेखनी से कालजयी पहचान बनाने वाले स्वर्गीय अमिताभ चक्रवर्ती की 72वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। स्थानीय रचनाकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने उनके भ्राता रवींद्र नाथ चक्रवर्ती के आवास पर एकत्र होकर उन्हें याद किया और उनके साहित्यिक सफर पर प्रकाश डाला।

 

*​पुष्पांजलि और भावपूर्ण श्रद्धांजलि*

 

​कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. अमिताभ चक्रवर्ती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि अमिताभ जी मात्र एक रचनाकार नहीं थे, बल्कि वे एक संस्था थे जिन्होंने छोटे से क्षेत्र में रहकर भी साहित्य की राष्ट्रीय मुख्यधारा में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।

 

*​सृजनात्मक आंदोलन और ‘निशांत’ की भूमिका*

 

​श्रद्धांजलि सभा में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि अमिताभ चक्रवर्ती ने गोविंदपुर जैसे छोटे से कस्बाई परिवेश में रहकर भी साहित्य की लौ को बुझने नहीं दिया। उन्होंने ‘निशांत’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों और युवाओं को लेखन के प्रति जागरूक किया। उन्होंने एक ऐसा सृजनात्मक आंदोलन खड़ा किया, जिसने कई नए रचनाकारों को मंच प्रदान किया और उन्हें साहित्य की बारीकियों से परिचित कराया।

​अनुवाद और राष्ट्रीय पटल पर पहचान

​अमिताभ चक्रवर्ती के साहित्यिक विस्तार पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने उनके संपादन और अनुवाद कार्य को विशेष रूप से रेखांकित किया।

 

उन्होंने ​’निशांत’ और ‘साहित्य सेतु’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से गंभीर साहित्यिक विमर्श को आगे बढ़ाया।

​प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘पहल’ के बांग्ला कविताओं पर केंद्रित विशेष अंक के लिए कविताओं का जो अनुवाद किया, उसने देशभर के साहित्यकारों का ध्यान आकर्षित किया।

 

​उनकी सबसे चर्चित कृतियों में ‘कम्युनिस्ट घोषणा पत्र’ पर आधारित पुस्तिका रही, जिसे ‘पहल’ के संपादक ज्ञान रंजन ने प्रकाशित किया था। इस कृति की गूँज देशभर के बौद्धिक जगत में सुनाई दी थी।

 

*​साहित्यिक धरोहर को सहेजने का संकल्प*

 

​वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अमिताभ जी का जाना साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, परंतु उनकी कृतियां आज भी मार्गदर्शक का कार्य कर रही हैं। उनके विचार और अनुवाद कार्य आज की युवा पीढ़ी के लिए एक धरोहर के समान हैं।

 

इस गरिमामय अवसर पर मुख्य रूप से एस. एन. लाल त्यागी, रवींद्र नाथ चक्रवर्ती, रामचंद्र मिश्र, मथन चंद्र दसोंधी, आर. के. शर्मा, सीमा पात्रा, विनोद आनंद, कल्याण चटर्जी, और संजय चौहान सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, साहित्य प्रेमी और बुद्धिजीवी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन अमिताभ जी की रचनाओं के पाठ और उनके द्वारा दिखाए गए साहित्यिक पथ पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *