
सरायकेला-खरसवाँ: जिले के चौका थाना क्षेत्र में विकास के नाम पर चल रहे स्पंज आयरन कारखाने अब आम जनता के लिए ‘काल’ साबित हो रहे हैं। सोमवार शाम जैसे ही मौसम बदला और तेज हवाएं चलीं, इन कारखानों से निकलने वाली जहरीली काली धूल और धुएं ने पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया। आलम यह था कि राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) पर दिन में ही अंधेरे जैसा मंजर दिखाई देने लगा।

विनाशकारी धुआं और प्रभावित क्षेत्र:

स्थानीय लोगों के अनुसार, सिद्धि विनायक स्पंज कंपनी (रुगड़ी), एमार एलॉय, जय मंगला स्पोंज़ (दुबराजपुर) जैसे कारखानों से निकलने वाला प्रदूषण क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। तेज हवा के झोंकों ने इस कालिख को चौका बाजार और रिहायशी इलाकों तक पहुंचा दिया। दुकानदारों और ग्राहकों ने आंखों में तेज जलन और सांस लेने में भारी तकलीफ की शिकायत की है।
NH-33 पर अफरा-तफरी:
प्रदूषण की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सड़क पर विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य के करीब पहुंच गई। काली धूल के कारण आंखों को खुला रखना असंभव हो गया, जिससे कई बाइक सवार सड़क पर फिसलकर गिर पड़े। वाहन चालकों ने बमुश्किल अपनी गति नियंत्रित कर बड़े हादसों को टाला। राहगीरों की स्थिति दयनीय बनी रही, लोग मुंह ढककर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
प्रशासनिक अनदेखी का आरोप:
क्षेत्र के नागरिकों का सीधा आरोप है कि ये कारखाने प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का सरेआम उल्लंघन कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की खामोशी पर सवाल उठाते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि आखिर कब तक उद्योगपतियों की मनमानी का खामियाजा आम जनता अपने स्वास्थ्य से चुकाएगी? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इन कारखानों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई और प्रदूषण पर लगाम नहीं कसी गई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
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