
सरायकेला: जिले के सरकारी +2 विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। पिछले 2 से 10 महीनों का मानदेय बकाया होने और पिछले 7 वर्षों से वेतन में कोई वृद्धि न होने के विरोध में, जिले के लगभग 80 प्रशिक्षकों ने आज, 11 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।

प्रमुख माँगें और आक्रोश

प्रशिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 10 वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनके प्रति उदासीन बना हुआ है। उनकी मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं:
बकाया मानदेय का भुगतान: 2 से 10 माह से लंबित वेतन अविलंब जारी किया जाए।
मानदेय में वृद्धि: पिछले 7 वर्षों से स्थिर वेतन में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए।
नियमितीकरण की दिशा में पहल: लंबे समय से कार्यरत कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
प्रशासनिक विफलता का आरोप
प्रदर्शनकारी प्रशिक्षकों के अनुसार, उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर पिछले 7 महीनों में राज्य परियोजना कार्यालय के कई चक्कर लगाए। 9 दिसंबर 2025 को जिले के प्रशिक्षकों ने JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) को ज्ञापन सौंपकर 3 महीने के भीतर समस्याओं के निराकरण का अनुरोध किया था।
“हमने बार-बार अपनी पीड़ा अधिकारियों के सामने रखी, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। बिना वेतन के परिवार का भरण-पोषण करना अब असंभव हो गया है। हमारे पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।” – प्रदर्शनकारी प्रशिक्षक
संवैधानिक अधिकार का प्रयोग
प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे विद्यालयों में प्रशिक्षण कार्य का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
इस हड़ताल से जिले के प्लस टू विद्यालयों में चल रहे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है, जिससे छात्रों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।
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