
धनबाद/बलियापुर: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक परंपराओं को लेकर दी गई कथित टिप्पणी ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री के इस बयान को “सनातन विरोधी” करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। धनबाद से लेकर बलियापुर तक भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

आस्था पर सवाल बर्दाश्त नहीं: राज सिन्हा

धनबाद के विधायक राज सिन्हा ने मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा और विश्वकर्मा पूजा जैसी सदियों पुरानी परंपराओं पर सवाल उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कथित तौर पर कहा था कि “भारत में पूजा-पाठ अधिक होता है, जबकि बुद्धिमत्ता और समृद्धि अन्य देशों में अधिक है।” इस पर पलटवार करते हुए राज सिन्हा ने कहा:
“भारत की पहचान उसकी संस्कृति और अटूट आस्था से है। इन्हीं जीवन मूल्यों के आधार पर भारत ‘विश्व गुरु’ बनने की राह पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री का यह बयान न केवल करोड़ों सनातनियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि यह देश की गरिमा पर भी प्रहार है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री अपनी इस प्रकार की “गैर-जिम्मेदाराना” बयानबाजी से बाज नहीं आते, तो जनता उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देगी।
बलियापुर में पुतला दहन और नारेबाजी
विरोध की आग धनबाद शहर से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच गई है। बलियापुर चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला फूँका। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री संवैधानिक पद पर बैठकर एक विशिष्ट समुदाय की भावनाओं को निशाना बना रहे हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में सिंदरी विधानसभा की भाजपा नेत्री श्रीमती तारा देवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा:
धार्मिक अपमान: हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
विकास बनाम आस्था: विकास और बुद्धिमत्ता का धर्म से टकराव दिखाना मुख्यमंत्री की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
जनाक्रोश: भाजपा का हर कार्यकर्ता सड़क से सदन तक इस अपमान का विरोध करेगा
विवाद की मुख्य जड़
विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर देश की प्रगति की तुलना यहाँ होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से कर दी। भाजपा का तर्क है कि पूजा और कर्म एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि विरोधी। भाजपा नेताओं का कहना है कि हेमंत सोरेन अपनी सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विभाजनकारी बयान दे रहे हैं।
निष्कर्ष
वर्तमान में झारखंड की राजनीति इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गरमाई हुई है। जहाँ एक ओर भाजपा इसे “सनातन धर्म पर हमला” बताकर जनता के बीच ले जा रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष की सफाई का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर चुनावी रैलियों तक गूंजने की पूरी संभावना है।
प्रमुख उपस्थित कार्यकर्ता:
इस अवसर पर प्रखंड अध्यक्षों सहित भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी, मंडल नेता और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर मुख्यमंत्री से माफी की मांग की।
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