
रिपोर्ट: वीरेंद्र बर्मन
झरिया: डांडिया और गरबा केवल नृत्य की विधाएं नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उल्लास की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ आपसी सौहार्द, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को भी बढ़ावा देते हैं। यह बात प्रशिक्षिका आबदा परवीन ने मारवाड़ी युवा मंच, झरिया शाखा एवं ईज़ी ईज़ी स्टेप्स डांस एकेडमी, झरिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय निःशुल्क डांडिया-गरबा प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर कही।

श्री अग्रसेन भवन, झरिया में 5 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस निःशुल्क कार्यशाला में कुल 31 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षक राखी साव ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को नृत्य की बारीकियां सीखने, अपनी प्रतिभा को निखारने और मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रतिभागियों के उत्साह और सीखने के प्रति उनकी रुचि की सराहना करते हुए आयोजकों की इस पहल को सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला प्रयास बताया।

छह दिनों तक चले इस निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को डांडिया एवं गरबा के विभिन्न स्टेप्स, लय, तालमेल और नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया। सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ अभ्यास किया और पारंपरिक लोकनृत्य की विभिन्न शैलियों को सीखा।
शनिवार को आयोजित समापन समारोह में सभी 31 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वहीं, कार्यशाला में प्रशिक्षण देने और आयोजन को सफल बनाने में योगदान के लिए चारों प्रशिक्षकों—आबदा परवीन, राखी साव, सृष्टि श्रियम एवं नकुल कुमार—को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में अतिथि के रूप में नूपुर साँवड़िया, शैलजा साँवड़िया एवं कविता साँवड़िया उपस्थित रहीं। इस अवसर पर मारवाड़ी युवा मंच, झरिया शाखा की अध्यक्ष किरण शर्मा, प्रांतीय संयोजक डॉ. मनीष शर्मा, कार्यक्रम संयोजक निक्की अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष विशाल पलसानिया, अविनाश अग्रवाल, शाखा सचिव सन्नी अग्रवाल, मयंक केजरीवाल, दिनेश शर्मा एवं खुशबू अग्रवाल भी मौजूद थे।
शाखा अध्यक्ष किरण शर्मा ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक लोकनृत्यों से जोड़ना, उनकी कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय संस्कृति एवं लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में प्रयास करना था। निःशुल्क प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी रुचि और प्रतिभा विकसित करने का अवसर मिला।
कार्यशाला के सफल आयोजन एवं समापन पर आयोजकों ने सभी 31 प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में रचनात्मकता, सहभागिता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रहेंगे।
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