
“बेटियाँ किसी की जागीर नहीं; आरक्षण सामाजिक न्याय का अधिकार, निजी जीवन पर टिप्पणी का औजार नहीं”
सखियमम फाउंडेशन की डायरेक्टर, समाजसेवी भारती दुबे ने मध्य प्रदेश के संतोष वर्मा द्वारा दिए गए एक कथित आपत्तिजनक बयान की कड़ी निंदा की है। भारती दुबे ने कहा कि यह बयान घटिया और समाज को तोड़ने वाली मानसिकता का नंगा उदाहरण है।
🚫 प्रमुख आपत्तियाँ और मांगे:

-
महिलाओं का सम्मान: उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं की स्वतंत्रता, सम्मान और विवाह का अधिकार कोई सौदेबाजी का सामान नहीं है जिसे आरक्षण की शर्तों में बांधा जाए।
-
जागीर नहीं बेटियां: भारती दुबे ने जोर देकर कहा कि बेटियां किसी की जागीर नहीं हैं, और उनके सम्मान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी बयान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
-
आरक्षण का दुरुपयोग: उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय का अधिकार है, न कि किसी की बेटियों के निजी जीवन पर टिप्पणी करने का औजार।
-
घिनौनी सोच: भारती दुबे ने संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण बेटियों की गरिमा को आरक्षण से जोड़ देने वाले बयान को घिनौनी सोच और एक शासनिक पद पर बैठे व्यक्ति की गंभीर मानसिक गिरावट का संकेत बताया।
-
कड़ी कार्रवाई की मांग: उन्होंने मांग की है कि इस भ्रष्ट पदाधिकारी को अविलंब उनके पद से हटाया जाए, अन्यथा आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा।
-
ब्राह्मण समाज की चेतावनी: उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज इस टिप्पणी पर किसी भी कीमत पर संतोष वर्मा को बक्शेगा नहीं।
-
माफी की मांग: भारती दुबे ने मांग की कि संतोष वर्मा सार्वजनिक स्पष्टीकरण दें और समाज की बेटियों से निःशर्त माफी माँगे।
उन्होंने यह दोहराया कि महिला, चाहे वे ब्राह्मण हों या किसी भी जाति की, सबको सम्मान, स्वायत्तता और समान अधिकार प्राप्त हैं, और उनकी गरिमा से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
