
वृंदावन से पधारे अंतर्राष्ट्रीय भागवत प्रवक्ता आचार्य श्री राजेंद्र जी महाराज ने भागवत कथा के पंचम दिवस में बताया कि भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए अनेक रूप धारण कर धरती पर अवतार लिया। उन्होंने राम, वामन, नरसिंह, कृष्ण, नारद और कश्यप जैसे रूपों में अवतरित होकर अधर्म का नाश किया।

आचार्य जी ने विशेष रूप से भगवान कृष्ण के अवतार का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने अपने बाल्यकाल में पूतना जैसी राक्षसी का वध किया। पूतना, जिसने भगवान को मारने का प्रयास किया, उसे भी भगवान ने सद्गति प्रदान की, जिससे उनकी असीम करुणा का पता चलता है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान केवल वस्तुओं के नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति के भूखे होते हैं। उनकी बाल लीलाएं, जैसे गोपियों के घर माखन खाना और बकासुर, वत्सासुर, और तृणावर्त जैसे राक्षसों का वध करना, उनकी दिव्यता और सामर्थ्य को दर्शाती हैं।

आचार्य श्री राजेंद्र जी ने गौ सेवा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गौ माता राष्ट्र की समृद्धि और उन्नति में सहायक होती हैं और उनके दूध से कई रोगों का निवारण होता है। इसलिए, हर व्यक्ति को गौ सेवा करनी चाहिए।
अंत में, उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि आज हमारे राष्ट्र की पवित्र नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाने की आवश्यकता है। हमारी संस्कृति और संस्कारों पर हो रहे आघातों का सामना करने के लिए लोगों को धर्म के माध्यम से जागृत होना और दूसरों को भी जागरूक करना जरूरी है। यह धर्म ही है जो हमें सही मार्ग दिखाता है और हमारी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करता है।
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