
निरसा: बाथना डांग स्थित जेपी हॉस्पिटल (यूनिट-2) में पिछले 11 महीनों से उपचाराधीन एक महिला की मौत के बाद आज अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। महिला की मृत्यु की खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

पुलिस की दखल से शांत हुआ मामला

हंगामे की सूचना मिलते ही एम.पी.एल. प्रभारी सुमन कुमारी अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुँचीं। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
डॉक्टर और परिजनों के विरोधाभासी बयान
घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बयानों में काफी अंतर देखा जा रहा है:
डॉक्टर का पक्ष: डॉ. पाथो ने बताया कि महिला की स्थिति पहले से ही अत्यंत नाजुक थी। उन्होंने परिजनों को पहले ही किसी अन्य बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों के विशेष आग्रह और लिखित सहमति (साइन कराए गए कागजात) के बाद ही इलाज शुरू किया गया था।
परिजनों का पक्ष: मृतका के मामा सुजीत रवानी ने बताया कि उनकी भगनी आँचल कुमारी (निवासी: पोदारडीह) का इलाज 21 जनवरी से बोकारो के एक अस्पताल में चल रहा था। वहां स्थिति गंभीर होने पर उसे निरसा के जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ आज उसकी जान चली गई।
11 महीने से चल रहा था इलाज
बताया जा रहा है कि आँचल कुमारी बुरी तरह झुलस गई थी और पिछले करीब 11 महीनों से वह जीवन और मौत के बीच झूल रही थी। आज अचानक उसकी मृत्यु हो गई, जिसे परिजन स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
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